Sunday, April 12, 2026
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इस्लामाबाद वार्ता: अमेरिका और ईरान से पीएम शरीफ की अलग-अलग बैठकें

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, शरीफ ने पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से बैठक की, जिसका नेतृत्व संसद स्पीकर मोहम्मद बगर गालिबाफ कर रहे हैं।

इस वक्त दुनियाभर की निगाहें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता पर टिकी हैं। शनिवार को ‘इस्लामाबाद टॉक्स’ के तहत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ ने अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, शरीफ ने पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से बैठक की, जिसका नेतृत्व संसद स्पीकर मोहम्मद बगर गालिबाफ कर रहे हैं। इस दौरान पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा गृहमंत्री सैयद मोहसिन रजा नकवी भी मौजूद रहे।

पाकिस्तानी पक्ष ने दोनों बैठकों को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है और उम्मीद जताई है कि इस्लामाबाद वार्ता क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

ईरान ने क्या कहा

वार्ता से पहले ईरान ने अपने रुख को साफ करते हुए संकेत दिया है कि समझौते की संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन कुछ शर्तें अहम होंगी। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने कहा कि अगर बातचीत “अमेरिका फर्स्ट” दृष्टिकोण के साथ होती है, तो दोनों पक्षों और दुनिया के लिए लाभकारी समझौता संभव है।

हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसमें इजरायल की भूमिका शामिल होती है, तो कोई डील नहीं होगी और ईरान अपने बचाव को और तेज करेगा।

ईरान के विदेश मंत्री मंत्री अब्बास अरागची ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह कथित अमेरिकी-इजरायली हमलों पर जिम्मेदार रुख अपनाए और हमलावरों को जवाबदेह ठहराए। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ बातचीत में आरागची ने कहा कि ईरान ने संघर्ष समाप्त करने, नुकसान की भरपाई और जवाबदेही तय करने की शर्तों पर सीजफायर को स्वीकार किया है, जिसे उन्होंने “जिम्मेदार कदम” बताया।

पाकिस्तान की भूमिका

इस बीच, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने इस्लामाबाद की मध्यस्थता कोशिशों की सराहना की। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा कि यह संघर्ष न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है और इसे रोकना जरूरी है।

उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर भी निशाना साधते हुए संकेत दिया कि अब यह देखना होगा कि क्या वॉशिंगटन इन मध्यस्थता प्रयासों का सम्मान करता है या नहीं।

वहीं, वार्ता के बीच उन खबरों ने तूल पकड़ा था कि अमेरिका, कतर और अन्य देशों के बैंकों में जमा ईरान की जब्त संपत्तियों (Assets) को रिलीज करने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि संपत्ति छोड़ने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। प्रशासन ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स गलत हैं।

शांति वार्ता के बीच जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजराइल की ओर से लेबनान में हमले जारी हैं, जबकि ईरान का कहना है कि प्रस्तावित सीजफायर में लेबनान भी शामिल है। हालांकि इजरायल ने इस दावे को खारिज किया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कहा है कि उनका देश लेबनान के साथ अलग से बातचीत करेगा।

आईएएनएस इनपुट के साथ

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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