कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस (TMC) में फूट खुलकर सामने आने लगी है। टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंच गए। संदीपन साहा के भी विधानसभा पहुंचने की खबर है। उन्होंने अपने साथ टीएमसी के 50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा किया है। सूत्रों के अनुसार बागी गुट उन्हें विपक्ष के नए नेता (LoP) के रूप में पेश करने पर विचार कर रहा है।
ऋतब्रत उन दो विधायकों में से एक थे जिन्हें सोमवार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका नाम लेने और यह कहने के ठीक कुछ मिनट बाद हुई कि स्पीकर को बागी नेता से औपचारिक तौर पर शिकायत मिली है।
दरअसल ऋतब्रत ने संदीपान साहा के साथ मिलकर आरोप लगाया था कि 6 मई को विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के नाम से संबंधित टीएमसी के प्रस्ताव दस्तावेज पर उन दोनों सहित कई अन्य टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे। पार्टी से निष्कासित होने के एक दिन बाद दोनों नेताओं को कई टीएमसी विधायकों के संपर्क में देखा गया है। मीडिया में विभिन्न सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने कोलकाता के एमएलए हॉस्टल में पार्टी के कई विधायकों से मुलाकात की, जिससे यह अटकलें तेज हो गई कि टीएमसी के भीतर एक ‘नया बागी गुट’ तैयार हो गया है।
ऋतब्रता बनर्जी मीडिया में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को खुले तौर पर चुनौती भी दे चुके हैं। वहीं, सोमवार को टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि निष्कासित दोनों विधायक पार्टी को बांटने करने का प्रयास कर रहे थे और उन्होंने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में कुछ विधायकों के साथ गुप्त बैठक की थी।
ममता बनर्जी के लिए बढ़ेगी मुश्किल
पश्चिम बंगाल में 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद चुनाव हारने वाली ममता बनर्जी के लिए ताजा हालात और मुश्किल बढ़ाने वाले हैं। बंगाल विधानसभा में टीएमसी ने 80 सीटें जीती हैं। ऐसे में अगर 50 से इससे ज्यादा विधायक अलग गुट बनाकर पार्टी से अलग होते हैं, तो राज्य का सियासी भूगोल पूरी तरह से बदल जाएगा।
ममता के लिए इसमें सबसे बड़ा खतरा पार्टी का छीन जाने का भी है। दरअसल कानूनी रूप से पार्टी में विभाजन और साथ ही विधायकी बचे रहने को लेकर नियम है कि कम से कम दो तिहाई विधायक अलग हों। टीएमसी के अभी 80 विधायक हैं, ऐसे में दो तिहाई का आंकड़ा 54 होता है। अगर टूट की स्थिति बनी और ऋतब्रत के पास 54 से अधिक विधायक आते हैं तो बागी गुट असली टीएमसी होने का दावा ठोक सकता है और फिर ये लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंच सकती है। वहीं, सदन में विपक्ष का तमगा भी ममता बनर्जी के गुट से छीन सकता है।
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