शांति वार्ता के लिए जब ईरान का आधिकारिक विमान इस्लामाबाद के रनवे पर उतरा, तो वह केवल राजनयिकों को लेकर नहीं आया था। विमान की अगली कतार की सीटों पर वीआईपी मेहमानों की जगह रखे थे- खून से सने स्कूल बैग, छोटे जूते, सफेद फूल और उन मासूम बच्चों की तस्वीरें जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। ईरान ने अपनी इस डेलिगेशन को नाम दिया “मिनाब 168”। यह उन 160 से अधिक बच्चों को दी गई एक भावुक रुला देने वाली श्रद्धांजलि थी, जो ईरान के दक्षिण शहर मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए थे।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ ने उड़ान के दौरान एक तस्वीर साझा की, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। विमान की सीटों पर रखे इन सामानों के साथ उन्होंने कैप्शन लिखा- “इस उड़ान में मेरे साथी #Minab168।” ईरानी दूतावासों ने इस वीडियो को साझा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्पष्ट संदेश दिया कि मिनाब के बच्चे हमेशा हमारे साथ हैं। कूटनीतिक गलियारों में इसे ईरान की एक ‘इमोशनल स्ट्राइक’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य बातचीत की मेज पर बैठने से पहले नैतिक दबाव बनाना है।
ईरान का कहना है कि 28 फरवरी, 2026 को मिनाब के एक गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर दिनदहाड़े बमबारी की गई थी, जिसमें 165 लोगों की जान गई। 160 से अधिक बच्चों की जान गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने इसे एक ऐसा ‘अपराध’ बताया है जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
दूसरी ओर, अमेरिका इस स्कूल को निशाना बनाने की बात से लगातार इनकार करता रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान की अपनी मिसाइलों की ‘सटीकता में कमी’ बताया था। हालांकि, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में ‘टोमहॉक मिसाइल’ की एक संभावित ‘टारगेटिंग एरर’ (निशाने की चूक) का जिक्र किया गया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता में कौन-कौन है शामिल?
शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचने पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। बातचीत के लिए ईरान का नेतृत्व स्पीकर मोहम्मद बगर गालिबाफ कर रहे हैं जिनें विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
वहीं, अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। इस डेलिगेशन में उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुश्नर भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि वार्ता दो चरणों में होगी। वार्ता के पहले चरण में ईरानी और अमेरिकी डेलिगेशन अलग-अलग कमरे में पाकिस्तानी डेलिगेशन से बात करेगी। वहीं दूसरे चरण में ईरान और अमेरिका के अधिकारी आमने-सामने बात करेंगे।
बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों ने अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है। गालिबाफ ने साफ तौर पर कहा कि ईरान अच्छे इरादों के साथ लेकिन भरोसे के बिना आ रहा है। उन्होंने अमेरिका पर पुराने समझौतों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि समझौता तभी होगा जब अमेरिका ईरानी लोगों के अधिकार देने के लिए तैयार होगा।
वहीं, अमेरिकी खेमे से जेडी वेंस ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी: “अगर ईरानी अच्छी नीयत से आते हैं, तो हमारा हाथ खुला है। लेकिन अगर वे हमारे साथ ‘गेम’ खेलने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी टीम कितनी तैयार है।”
इस पूरी शांति वार्ता के पीछे राष्ट्रपति ट्रंप की सोशल मीडिया टिप्पणियां भी आग में घी डालने का काम कर रही हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान अपनी ताकत को जरूरत से ज्यादा आंक रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य का तनाव इस पूरे भू-राजनीतिक खेल का एक छोटा हिस्सा मात्र है। बातचीत से पहले ईरान को धमकी देतेत हुए ट्रंप ने कहा कि वे इसलिए जिंदा हैं ताकि बातचीत कर सकें।
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