देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ान सेवाएं दिसंबर की शुरुआत से चरमराई हुई हैं। सिविल एविएशन रेगुलेटर के द्वारा विंटर शेड्यूल में 6 प्रतिशत उड़ानें बढ़ाने की अनुमति मिलने के कुछ ही हफ्तों बाद, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उल्टा 10 प्रतिशत उड़ानें घटाने का फैसला किया है। नई फ्लाइट रोस्टरिंग और ड्यूटी टाइमिंग नियमों को पूरा करने में इंडिगो नाकाम रही, लिहाजा 1 से 9 दिसंबर के बीच एयरलाइन को 5,500 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
लोकसभा में 8 दिसंबर को पेश आंकड़ों के मुताबिक इंडिगो ने जनवरी 2024 में प्रस्तावित नए नियमों के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की। पायलटों की संख्या मार्च 2025 में 5,463 थी, जो दिसंबर तक घटकर 5,085 रह गई। यह लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट है।
यह स्थिति उस दावे के बिल्कुल उलट है जो कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर इसिड्रो प्रोक्वेरास ने डीजीसीए को दिया था। उनका कहना था कि नए नियम लागू करने पर सिर्फ 3 प्रतिशत अतिरिक्त क्रू की जरूरत पड़ेगी। असल में एयरलाइन के पास पायलट कम हो गए। इसके उलट, इसी अवधि में एयर इंडिया के पायलट 3,280 से बढ़कर 6,350 और स्पाइसजेट के 369 से बढ़कर 385 हो गए।
दिसंबर में गहराया संकट, सरकारी ढील का पायलट संगठनों ने किया विरोध
नवंबर में इंडिगो 1,200 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर चुकी थी, जिनमें करीब 750 उड़ानें नए नियमों की वजह से रद्द हुईं। दिसंबर में हालात बदतर हुए। इसे देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इंडिगो को नियमों में ढील दी। कई विश्लेषकों ने इसे एयरलाइन के दबाव के आगे झुकना बताया है।
अंतरराष्ट्रीय पायलट संघ आईएफएएलपीए के अध्यक्ष कैप्टन रॉन हे ने कहा कि भारत का यह फैसला चिंताजनक है क्योंकि यह किसी वैज्ञानिक आधार पर नहीं है। उनके अनुसार, स्टाफ की कमी को आधार बनाकर नियमों को ढीला करना सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।
पायलट संगठनों का कहना है कि इंडिगो ने जानबूझ कर स्टाफ कम रखा, वेतन और हायरिंग दोनों पर रोक लगाई, ताकि मंत्रालय पर दबाव बनाया जा सके। अल्पा इंडिया और एफआईपी ने इसे एयरलाइन की कमजोर और गैर-पारंपरिक मानव संसाधन नीति का नतीजा बताया।
डीजीसीए ने जनवरी 2024 में नए नियम इसलिए लागू किए ताकि पायलटों की थकान कम हो और उड़ान सुरक्षा मजबूत हो सके। इन नियमों में साप्ताहिक आराम को 36 से बढ़ाकर 48 घंटे करना, नाइट फ्लाइट की सीमा तय करना और लगातार फ्लाइट ड्यूटी समय को कम करना जैसे बदलाव शामिल थे। एयरलाइंस के विरोध के कारण इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया और इनका अंतिम चरण 1 नवंबर से प्रभावी हुआ।
इंडिगो घरेलू बाजार में 65 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में उसके संचालन में आई गड़बड़ी का असर देश भर की उड़ानों पर दिखा। मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार, 1 दिसंबर को डीजीसीए बैठक में इंडिगो ने कोई विशेष चिंता नहीं जताई थी, जबकि अगले ही दिन संकट शुरू हो गया। 1 से 8 दिसंबर के बीच उसने करीब 4,500 उड़ानें रद्द कीं।
एक पूर्व एयरलाइन अधिकारी ने इसे इंडिगो की खुद बनाई हुई मुश्किल बताया। उनके अनुसार, नए नियमों को लागू करने के लिए कम से कम 20 प्रतिशत ज्यादा पायलटों की जरूरत थी। “ऐसे समय में पायलटों की संख्या घटाना समझ से बाहर है।”

