इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने गुरुवार (6 अगस्त) को लगातार दूसरे दिन दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) से पूछताछ की। भारत आई ग्लोबल टीम से सरकार ने यह पूछा कि क्या कंपनी भारतीय कानूनों का पालन कर रही है। गौरतलब है कि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाने के मामले में इस सोशल मीडिया कंपनी को तलब किया था।
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को मेटा की ग्लोबल टीम से मुलाकात की जबकि MeitY के अधिकारियों और कंपनी की टेक्निकल टीमों के बीच बातचीत दूसरे दिन भी जारी रही।
अमेरिकी कानूनों के तहत काम नहीं कर सकते, सरकार की Meta को सख्त चेतावनी
सरकारी अधिकारियों ने कहा, ” भारत में अमेरिकी कानूनों के आधार पर प्लेटफॉर्म नहीं चलाए जा सकते। ये तकनीकी मामले हैं और इनके हर पहलू को समझना जरूरी है। हमारा मकसद समाज के भले के लिए कानून का इस्तेमाल करना है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए किसी अलग रेगुलेटर पर विचार नहीं कर रही है और उसके कदम संवैधानिक ढांचे के तहत उठाए जा रहे हैं। इसमें आर्टिकल 19 के तहत जायज पाबंदियां भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफॉर्म लॉग समेत तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोगों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है क्योंकि डीपफेक टेक्नोलॉजी तेजी से और ज्यादा एडवांस होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार मेटा, X और टेलीग्राम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म के साथ लगातार संपर्क में है।

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मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने मांगी माफी
मेटा के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने की। उन्होंने कंपनी की ओर से फिर से माफी मांगी और प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने को एक तकनीकी गड़बड़ी बताया।
इस बैठक के दौरान फेसबुक और इंस्टाग्राम के अधिकारियों ने कंटेंट मॉडरेशन के तरीकों, एल्गोरिदम सिस्टम और आंतरिक सुरक्षा उपायों पर भी चर्चा की।
मेटा के साथ हुई बातचीत के अलावा MeitY ने IT नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है जिसका मकसद AI से बनी गलत जानकारी और डीपफेक पर रोक लगाना है।
ड्राफ्ट नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को सरकार या कोर्ट का सही आदेश मिलने के तीन घंटे के अंदर गैर-कानूनी AI-जनरेटेड कंटेंट को हटाना होगा। फिलहाल इसके लिए अभी 36 घंटे की समय-सीमा है।
इन प्रस्तावों में AI-जनरेटेड कंटेंट की साफ लेबलिंग, शिकायतों के निपटारे के लिए तेज समय-सीमा और डीपफेक, किसी और का रूप धरने (इम्पर्सोनेशन) और दूसरे नुकसानदेह सिंथेटिक मीडिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।
संशोधनों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया गया है और उम्मीद है कि सरकार नियमों को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया की समीक्षा करेगी।
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