केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तुलनात्मक तौर पर फायदा मिले।
गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी सीनेट ने रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाने के लिए लाए गए एक बिल पर चर्चा को मंजूरी दी है। इसमें एक प्रावधान ऐसा भी है, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों से आने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस की खरीदते हैं। जाहिर तौर पर इनमें भारत भी शामिल है।
डील का पहला चरण तैयार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल ने पत्रकारों से कहा कि दोनों देशों के बीच बीटीए का पहला चरण पहले ही अंतिम रूप ले चुका है। उन्होंने कहा, ‘हमने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दे दिया है। इसकी घोषणा दोनों देशों के नेताओं ने 3 फरवरी को की थी। यह समझौता तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों, विशेषकर पड़ोसी देशों और आसियान क्षेत्र के देशों के मुकाबले तुलनात्मक लाभ मिले।’
गोयल ने कहा कि यही इस समझौते के पहले चरण का आधार है। उन्होंने कहा, ‘जैसे ही यह आधार स्थापित होगा, भारत-अमेरिका बीटीए लागू होने के लिए तैयार होगा। भारत अपने निर्यात को बढ़ाता रहेगा और अमेरिकी बाजार में मौजूद बड़े अवसरों का लाभ उठाता रहेगा।’
दूसरी ओर अमेरिकी सीनेट ने हाल में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए एक बिल पर आगे बढ़ने के पक्ष में 86-12 से मतदान किया। हालांकि, यह अभी कानून नहीं बना है। इसे अभी सीनेट की आगे की प्रक्रियाओं से गुजरना होगा और उसके बाद हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की मंजूरी भी जरूरी होगी।
प्रस्तावित विधेयक का एक अहम प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह उन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखेंगे।
इसके अलावा विधेयक में रूस के अधिकारियों और प्रभावशाली उद्योगपतियों पर प्रतिबंध लगाने, रूसी वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने, मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल की ढुलाई करने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर कार्रवाई करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। बिल के समर्थकों के अनुसार रूस की ऊर्जा आय कम करना जरूरी है, ताकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद देने की क्षमता कमजोर हो सके। यूक्रेन में युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
भारत क्यों है चर्चा में?
दरअसल, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है। इसी वजह से अमेरिकी सीनेट के इस प्रस्तावित बिल को लेकर भारत और चीन विशेष रूप से चर्चा में हैं, क्योंकि दोनों देश रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं।
अगर यह बिल कानून बनता है और अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, तो भारत और चीन से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, यह बिल भारत पर अपने आप कोई टैरिफ नहीं लगाता। यह केवल अमेरिकी राष्ट्रपति को व्यापक प्रतिबंध व्यवस्था के तहत ऐसा करने का अधिकार प्रदान करता है। फिलहाल भारत पर कोई नया टैरिफ लागू नहीं किया गया है और दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक व्यवस्था में भी तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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