नई दिल्ली: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को सहयोग देने की बात मानने संबंधी मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि जो देश खुद को जिम्मेदार शक्तियां मानते हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि ऐसे काम का उनकी विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ता है।
यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि एक चीनी अधिकारी ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के साथ सैन्य टकराव बढ़ने के दौरान पाकिस्तान को बीजिंग द्वारा जमीनी स्तर पर तकनीकी सहायता दिए जाने की बात स्वीकार की थी।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं और दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर एक सुनियोजित और लक्षित जवाबी कार्रवाई थी। उन्होंने कहा, ‘हमने ये रिपोर्टें देखी हैं जो पहले से ज्ञात बातों की पुष्टि करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में हुए आतंकवादी हमलों का एक सटीक, लक्षित और सुनियोजित जवाब था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान से संचालित और उसके इशारे पर काम कर रहे राज्य-प्रायोजित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो राष्ट्र स्वयं को जिम्मेदार वैश्विक दर्जा देने का दावा करते हैं, उन्हें आतंकवाद से जुड़े बुनियादी ढांचे का समर्थन करने या उसे बढ़ावा देने के परिणामों पर विचार करना चाहिए।
जायसवाल ने कहा, ‘जो राष्ट्र खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि क्या आतंकवादी बुनियादी ढांचे की रक्षा करने के प्रयासों का समर्थन करने से उनकी प्रतिष्ठा और रुतबे पर असर पड़ता है।’
चीनी अधिकारी ने किया था खुलासा
पिछले सप्ताह चीनी मीडिया द्वारा प्रसारित एक इंटरव्यू में, एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना (एवीआईसी) के चेंगदू विमान डिजाइन और अनुसंधान संस्थान के इंजीनियर झांग हेंग ने कथित तौर पर संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को चीन द्वारा दी गई सहायता का जिक्र किया था।
झांग ने कहा कि वह उस टीम का हिस्सा थे जिसे भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैनात किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘सहायता केंद्र पर, हम लगातार लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने और हवाई हमले के सायरन बजने की आवाज सुनते थे। मई की सुबह तक तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक हो जाते थे। यह हमारे लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था।’
पाकिस्तान चीन निर्मित जे-10सीई लड़ाकू विमानों का संचालन करता है। झांग ने कहा कि उनकी टीम का लक्ष्य ‘बेहतर ऑन-साइट सहायता’ सुनिश्चित करना है और यह सुनिश्चित करना कि ये प्रणालियाँ ‘अपनी पूरी युद्ध क्षमता के साथ प्रदर्शन’ कर सकें। झांग के इन बयानों को भारत के साथ टकराव के दौरान पाकिस्तान के साथ चीन की तकनीकी भागीदारी के पहले सार्वजनिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि चीन ने भारतीय सैन्य संपत्तियों से संबंधित संवेदनशील डेटा साझा करके पाकिस्तान की सहायता की। अमेरिकी रक्षा विभाग की एक हालिया रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि चीन ने सूचना युद्ध, साइबर ऑपरेशन, खुफिया सहायता और राजनयिक समर्थन के माध्यम से पाकिस्तान का समर्थन किया।

