नई दिल्ली: भारत ने अपनी रणनीतिक रक्षा क्षमता को और सशक्त करते हुए अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 6 फरवरी को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया। मिसाइल ने निर्धारित योजना के अनुसार अपने सभी लक्ष्य पूरे किए।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान अग्नि-3 के सभी तकनीकी और ऑपरेशनल पैरामीटर पूरी तरह सफल रहे। यह लॉन्च स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में किया गया, जो देश की अहम रणनीतिक क्षमताओं की जिम्मेदारी संभालता है। शुक्रवार को हुए इस परीक्षण से भारत की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस क्षमता की विश्वसनीयता एक बार फिर साबित हुई है।
अग्नि मिसाइल शृंखला की ताकत
अग्नि शृंखला की मिसाइलें भारत की रणनीतिक सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। इस श्रृंखला में 700 किलोमीटर रेंज वाली अग्नि-1, 2,000 किलोमीटर रेंज की अग्नि-2, 3,000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-3 और 4,000 किलोमीटर रेंज वाली अग्नि-4 शामिल हैं। वहीं, इस श्रृंखला की सबसे उन्नत मिसाइल अग्नि-5 है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है।
भारत ने बीते वर्ष अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया था, जिसे देश की मिसाइल क्षमता में एक बड़ी उपलब्धि माना गया। यह परीक्षण भी ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में किया गया था। इस दौरान मिसाइल की मार्गदर्शन प्रणाली, प्रणोदन, स्टेज सेपरेशन और अंतिम सटीकता सहित सभी अहम पहलुओं को सफलतापूर्वक परखा गया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सूत्रों के अनुसार, 700 किलोमीटर रेंज वाली अग्नि-1 मिसाइल का इस्तेमाल न्यूनतम 220 किलोमीटर दूरी के लक्ष्यों को भेदने के लिए भी किया जा सकता है। यह क्षमता पृथ्वी श्रृंखला की मिसाइलों (150 से 350 किलोमीटर रेंज) के दायरे को कवर करने में मदद करती है और सेना को कम व मध्यम दूरी के लक्ष्यों पर कार्रवाई में अधिक लचीलापन देती है।
इसी बीच भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस और निगरानी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। सेना ने 30 लो-लेवल लाइटवेट रडार की खरीद के लिए करीब 725 करोड़ रुपये की निविदा जारी की है। यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जा रही है, ताकि सिस्टम जल्द से जल्द सेना में शामिल हो सकें।
ये रडार ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और छोटे व धीमे लक्ष्यों का पता लगाने में बेहद प्रभावी होंगे। मौजूदा समय में ड्रोन से बढ़ते खतरों को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। इन रडारों की तैनाती से सीमाओं पर निगरानी और एयर डिफेंस व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
–आईएएनएस इनपुट के साथ

