नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने शनिवार को चांदी के आयात को लेकर नया नियम लागू करने का फैसला किया। सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों के आयात को अब प्रतिबंधित (रिस्ट्रिक्टेड) श्रेणी में रखने का फैसला किया है। इस श्रेणी में रखने का मतलब है कि अब चांदी से इससे जुड़े वस्तु को देश में लाने के लिए सरकारी लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सिल्वर बार के साथ-साथ बिना तराशी हुई चांदी, अर्ध-निर्मित चांदी और पाउडर के रूप में भी चांदी के आयात के लिए अब सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। चांदी के आयात की कुछ श्रेणियों को भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अंतर्गत भी लाया गया है।
यह महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में भारी वृद्धि के कुछ ही दिनों बाद आया है। इसी हफ्ते सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क में भारी वृद्धि करते हुए इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। सरकार के इस कदम का उद्देश्य देश में सोने-चांदी की खरीद को हतोत्साहित करना और गैर-जरूरी आयात में कटौती करना है। केंद्र सरकार सोना और चांदी के आयात पर निगरानी बढ़ाकर विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करना चाहती है।
चांदी की सप्लाई चेन पर सख्त नियंत्रण
ताजा संशोधन में औद्योगिक और निवेश क्षेत्रों में उपयोग होने वाली चांदी के विभिन्न रूपों को शामिल किया गया है। इनमें बुलियन-ग्रेड धातु और विनिर्माण में उपयोग होने वाले सेमी-प्रोसेस्ट इनपुट शामिल हैं। अब तक, इन श्रेणियों को मुख्य रूप से ‘मुक्त’ आयात व्यवस्था के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया था, जिससे आयातकों को मानक नियामक निगरानी के अधीन माल आयात करने की अनुमति थी। नए ढांचे के तहत, अब इन्हें पहले अधिकारियों से पूर्व में स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
इससे पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अग्रिम प्राधिकरण (एए) योजना के तहत रत्न और आभूषण निर्यातकों द्वारा शुल्क-मुक्त सोने के आयात के लिए नियमों को भी सख्त कर दिया है। नए बदवाल के तहत एए के अंतर्गत सोने के आयात की सीमा प्रति लाइसेंस 100 किलोग्राम तय की गई है। जबकि पहली बार आवेदन करने वालों को मंजूरी मिलने से पहले विनिर्माण सुविधाओं का अनिवार्य निरीक्षण करवाना होगा।
इसके अलावा पुराने लाइसेंस के तहत कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात दायित्व पूरा करने के बाद ही नई अनुमति दी जाएगी। ड्यूटी-फ्री गोल्ड आयात करने वाले निर्यातकों को अब हर 15 दिन में चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित आयात-निर्यात रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।
भारत में सोने के आयात की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि आयात की मात्रा कम रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण कुल आयात बिल बढ़ गया। भारत में सबसे अधिक सोना स्विट्जरलैंड से आयात किया गया, जबकि यूएई और दक्षिण अफ्रीका दूसरे और तीसरे बड़े स्रोत रहे।
हालांकि, सरकार के कदमों के बीच ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) सहित कई उद्योग संगठनों ने सरकार के इस कदम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा आयात शुल्क और कड़े प्रतिबंधों से ग्रे मार्केट गतिविधियां और तस्करी बढ़ सकती है।
भारत असल में चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। इसमें मुख्य रूप से मांग आभूषण क्षेत्र और वैश्विक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की खरीद को लेकर रहती है। भारत ने 2025 में घरेलू स्तर पर लगभग 800 टन सोने की खपत की थी। इसमें से लगभग 10-11% सोने के रिसाइकलिंग से प्राप्त हुआ, जबकि घरेलू उत्पादन का योगदान केवल 1% था। वहीं, लगभग 85-90% सोना आयात किया गया। 2024-25 में सोने का कुल आयात 58.0 बिलियन डॉलर का था।
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