दिसपुरः असम में भाजपा नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (12 मई) को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। वह लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी में आयोजित किया गया और राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हिमंता के शपथ ग्रहण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी।
इससे पहले रविवार (10 मई) को राज्यपाल ने उन्हें विधायक दल का नेता नियुक्त किया था। पूर्वोत्तर राज्य असम में एनडीए ने गहरी पकड़ स्थापित की है। राज्य में एनडीए की लगातार तीसरी बार सरकार बनी है। साल 2016 में सर्वानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने थे। वहीं, 2021 में हिमंता बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी। एक बार फिर से उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है।
शपथ समारोह में पीएम मोदी समेत ये नेता हुए शामिल
हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा रहा। इस दौरान पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण समेत एनडीए के घटक दलों के कई अन्य नेता शामिल हुए।
पीएम मोदी ने सरमा के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। इस बाबत पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट भी की।
सरमा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। पहले वह कांग्रेस के नेता हुआ करते थे। साल 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अमित शाह की पहल पर भाजपा का दामन थामा था। उस समय असम में कांग्रेस का दबदबा था और भाजपा के पास केवल पांच विधायक थे लेकिन हिमंता सरमा ने भाजपा को पूर्वोत्तर में मजबूत करने के लिए रणनीतिक तरीके से काम किया।
2016 में भाजपा ने उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया। इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पूर्वोत्तर में भाजपा के तेजी से बढ़ते प्रभाव के पीछे हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति सबसे बड़ा कारण रही।
हिमंत बिस्वा सरमा ने एलएलबी, पीएचडी की पढ़ाई की
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की शिक्षा भी पूरी तरह गुवाहाटी में हुई। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई कामरूप अकादमी से की। बाद में प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए की डिग्री हासिल की। फिर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर कुछ समय तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत भी की।
साल 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध विषय ‘नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल: ए स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल एनालिसिस’ था। इसमें पूर्वोत्तर भारत के विकास में परिषद की भूमिका का अध्ययन किया गया था।

उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1991-92 में वह कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे और बाद में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) से जुड़े। 1990 के दशक में उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया और 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बने। खास बात यह है कि वह इस सीट से अब तक लगातार जीतते आ रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल में चुनाव आयोग द्वारा जारी नतीजों में असम की 126 विधानसभा सीटों में भाजपा ने 82 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, कांग्रेस को 19 सीटों पर जीत मिली। बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट को 10 सीटों पर जीत मिली। वहीं, असम गण परिषद ने भी 10 सीटों पर जीत दर्ज की।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

