Sunday, March 22, 2026
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H-1B Visa: ट्रंप ने सेल्फ गोल तो नहीं कर लिया! क्या भारत उठा सकता है फायदा?

H-1B Visa Fee hike: कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा के शुल्क बढ़ाने से नुकसान अमेरिका का ही होगा। कई प्रतिभाएं अमेरिका जाने से अब बचेंगी। संभव है कि कंपनियां भी आने वाले दिनों में भारत में अपना कामकाज बढ़ाएं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B Visa पर 1,00,000 डॉलर (88 लाख रुपये) का भारी-भरकम शुल्क लगाने के फैसले को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है। भारत पर ये फैसला बड़ा असर करेगा। यही वजह है कि भारतीय उद्योग जगत के बड़े नाम, राजनीतिक हस्तियों और कई अन्य लोग इस पर अपनी राय दे रहे हैं। ट्रंप के फैसले पर अलग-अलग राय है। कई लोगों का मानना ये भी है कि यह कदम भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है और अमेरिका को बड़ा नुकसान भी पहुंचा सकता है।

H-1B Visa की फीस बढ़ाने का ये पूरा फैसला क्या है, पहले इसे समझते हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर का अनिवार्य वार्षिक शुल्क लागू करने वाले एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया, जो रविवार से प्रभावी हो रहा है। वर्तमान में, एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क 2,000 से 5,000 डॉलर (डेढ़ लाख से साढ़े चार-पांच लाख रुपये) तक का है। ये वीजा तीन साल के लिए होते हैं और रिन्यू करते हुए इसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी कंपनियां उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने के लिए करती रही हैं। जाहिर तौर पर इनमें से ज्यादातर भारत से होते हैं। अब ताजा बदलाव की वजह से हर साल वीजा रिन्यू में 88 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।

ट्रंप ने अपने ताजा फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि इससे अमेरिकी लोगों की नौकरियों की सुरक्षा हो सकेगी। उन्होंने साथ ही तर्क दिया कि आउटसोर्सिंग कंपनियां H-1B Visa का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते विदेशी प्रतिभाओं को लाने के लिए कर रही हैं। उन्होंने इसे आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों ही दृष्टि से एक मुद्दा बताया। उन्होंने साथ ही कहा कि इससे ये भी सुनिश्चित होगा कि कंपनियां जिन लोगों को बाहर से लाएंगी, वे अत्यधिक कुशल होंगे।

अमेरिका को कहीं और नुकसान न हो जाए…

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत इस मुद्दे पर सबसे पहले कड़ी प्रतिक्रिया देने वालों में से एक थे। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘डोनाल्ड ट्रंप का 1,00,000 एच-1बी शुल्क अमेरिकी नवाचार को रोक देगा और भारत के नवाचार को गति देगा। वैश्विक प्रतिभाओं के लिए दरवाजा बंद करके, अमेरिका प्रयोगशालाओं, पेटेंट, नवाचार और स्टार्टअप्स की अगली लहर को बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे और गुड़गांव की ओर धकेल रहा है।’

कांत ने तर्क दिया कि भारत के पास अब अपने डॉक्टरों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने का अवसर है, जो अमेरिका में काम करना चुनते।

इसके अलावा इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ और निवेशक मोहनदास पई ने कहा कि भारी भरकम फीस नए वीजा के आवेदकों को हतोत्साहित करेगी। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पई ने कहा, ‘इसके आवेदन सीमित हैं, क्योंकि… यह पहले से मौजूद सभी एच-1बी वीजा पर लागू नहीं होता। इसलिए भविष्य में इसका असर केवल नए आवेदनों में कमी के रूप में ही पड़ेगा। कोई भी 1,00,000 डॉलर का भुगतान नहीं करने वाला है, यह बिल्कुल सच है।’

यह भी पढ़ें- एच-1बी वीजा नियमों में बदलाव के बाद टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को दिया 24 घंटे के भीतर लौटने का निर्देश

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी कंपनियाँ तेजी से अपना काम विदेशों में शिफ्ट करेंगी, जिससे भारत को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘अब होगा यह कि हर कंपनी ऑफशोरिंग बढ़ाने के लिए काम करेगी… क्योंकि इसका कोई मतलब नहीं है, एक तो आपको प्रतिभा नहीं मिलेगी, दूसरी लागत बहुत ज़्यादा है। यह अगले छह महीने से एक साल में होगा।’

भारत के लिए फायदा साबित होगा ट्रंप का फैसला?

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ताजा फैसला फिलहाल एक साल के लिए लागू हो रहा है। यही सही है कि इस फैसले से अमेरिका में काम करने के इच्छुक भारतीय पेशेवरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि दीर्घकालिक प्रभाव भारत के लिए सकारात्मक हो सकता है।

वीजा पर अतिरिक्त फीस से कंपनियां बचना चाहेंगी। ऐसे में वे भारत में ही अपने कामकाज का विस्तार कर सकती हैं। इससे बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुड़गांव में तेज विकास को बढ़ावा मिलेगा। भारत में लागत और पारिश्रमिक आदि भी कम है।

वीजा में आने वाली परेशानियों को देखते हुए ये भी संभव है कि कई प्रतिभाएं भारत की ओर वापस रुख करेंगी। उद्यमी और स्नैपडील के सह-संस्थापक कुणाल बहल ने भी मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए एक्स पर कहा कि नए नियमों के कारण कई कुशल पेशेवर स्वदेश लौट जाएँगे। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘नए एच-1बी नियमों की वजह से, बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली लोग भारत वापस आएँगे।’

एक अलग पोस्ट में उन्होंने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए लिखा, ‘2007 में, माइक्रोसॉफ्ट में अपने डेस्क पर बैठे हुए, मुझे एक ईमेल मिला कि मेरा H1B वीजा अस्वीकार कर दिया गया है। उस पल यह बहुत निराशाजनक और स्तब्ध करने वाला था, लेकिन आखिरकार जब मैं भारत वापस आया तो जिंदगी बदल गई। आज जो लोग प्रभावित हुए हैं, उनसे अनुरोध है कि वे सकारात्मक रहें। आपके लिए कुछ बहुत बड़ा और बेहतर होने वाला है।’

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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