संसदीय राजनीति के अनुभवी और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की उच्च सदन में एक बार फिर वापसी हुई है। 9 अप्रैल को कार्यकाल समाप्त होने के ठीक बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई के रिटायर होने से खाली हुई सीट पर हरिवंश का मनोनयन हुआ है, जिसके बाद अब वे 2032 तक सदन का हिस्सा रहेंगे।
इस बार जदयू ने उन्हें राज्यसभा के लिए टिकट नहीं दिया था। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले ने साफ कर दिया कि उनकी संसदीय भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रपति द्वारा उनका मनोनयन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं। पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में हरिवंश के दशकों लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ है।
पीएम मोदी ने पहले ही दे दिया था ‘कमबैक’ का संकेत
हरिवंश की इस वापसी की पटकथा बजट सत्र के दौरान ही लिखी जा चुकी थी। 18 मार्च को विदाई समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा था कि हरिवंश की राजनीतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है। पीएम के उस ‘हिंट’ के बाद से ही यह माना जा रहा था कि सरकार उन्हें किसी बड़ी भूमिका में बनाए रखना चाहती है।
हरिवंश नारायण सिंह राजनीति में आने से पहले लंबे समय तक पत्रकार रहे हैं। वे सबसे पहले 2018 में राज्यसभा के उपसभापति बने। इसके बाद 2020 में दोबारा चुने गए। अब सबसे बड़ा सवाल उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, मनोनीत सांसद भी उपसभापति बनने की योग्यता रखता है। अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा अपने सदस्यों में से किसी को भी उपसभापति चुन सकती है। ऐसे में यदि सरकार और सदन के बीच सहमति बनती है, तो वे एक बार फिर इस गरिमामय पद पर आसीन हो सकते हैं।
30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्मे हरिवंश की शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में हुई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाइम्स ग्रुप के साथ पत्रकार के रूप में की थी। पत्रकारिता से राजनीति में आए हरिवंश ने अपनी तटस्थता और विधायी कार्यों की गहरी समझ के कारण पक्ष और विपक्ष, दोनों के बीच सम्मान अर्जित किया है।
जहां एक ओर हरिवंश नारायण सिंह मनोनीत सदस्य के रूप में नई पारी शुरू कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली।
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