Friday, March 20, 2026
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हरिद्वार: हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, गंगा सभा ने लगाए बोर्ड; गरमाई सियासत

गंगा सभा के सचिव उज्ज्वल पंडित ने इस प्रक्रिया की निगरानी करते हुए कहा कि घाटों की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। गंगा सभा ने राज्य सरकार से यह मांग भी की है कि हर-की-पौड़ी पर ड्यूटी में गैर-हिंदू सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की तैनाती न की जाए।

हरिद्वार: तीर्थ नगरी हरिद्वार की हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले पोस्टर लगाने से विवाद खड़ा हो गया। गंगा घाटों के प्रबंधन की सर्वोच्च संस्था ‘गंगा सभा’ ने शुक्रवार को ब्रह्मकुंड और हर-की-पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले होर्डिंग्स और फ्लेक्स बैनर लगा दिए हैं। संस्था का तर्क है कि यह कदम इस प्राचीन तीर्थ स्थल की पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

इस कदम पर हरिद्वार नगर निगम के टाउन कमिश्नर नंदन कुमार ने कहा कि मामला प्रशासन के संज्ञान में है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार से निर्देश मिलने पर उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि यह फैसला किसी नए नियम के तहत नहीं, बल्कि 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन में बने हरिद्वार नगर पालिका के उपविधियों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि इन उपविधियों में हर की पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश, निवास और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध का प्रावधान है। गौतम ने कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और पवित्र स्थल पर गैर-हिंदुओं की आवाजाही की घटनाओं को देखते हुए गंगा सभा ने इन प्रावधानों का पालन शुरू किया है।

उन्होंने बताया कि पिछले महीने भी गंगा सभा ने यह मांग उठाई थी कि हर-की-पौड़ी ही नहीं, बल्कि हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए, ताकि इस प्राचीन तीर्थ की धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे। शुक्रवार से इस संबंध में औपचारिक रूप से सूचना बोर्ड लगाए गए हैं।

गंगा सभा के सचिव उज्ज्वल पंडित ने इस प्रक्रिया की निगरानी करते हुए कहा कि घाटों की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। गंगा सभा ने राज्य सरकार से यह मांग भी की है कि हर-की-पौड़ी पर ड्यूटी में गैर-हिंदू सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की तैनाती न की जाए।

हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आजादी के बाद 1954 में बने हरिद्वार नगर पालिका उपविधियों में यह भी स्पष्ट है कि हर-की-पौड़ी और कुशावर्त घाट जैसे कुछ पवित्र स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर सामान्य तौर पर रोक है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है।

भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

इस पूरे मुद्दे पर सियासी घमासान भी शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने गंगा सभा के इस कदम का विरोध किया है। पूर्व हरिद्वार नगर पालिका अध्यक्ष और सोनीपत से सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि गंगा घाट और कुंभ मेला क्षेत्र रुड़की तक फैला हुआ है, जहां बड़ी संख्या में गैर-हिंदू रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बहु-धार्मिक समाज में इस तरह का व्यापक प्रतिबंध कितना व्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि विभाजनकारी मुद्दे उठाने के बजाय आगामी अर्धकुंभ के बेहतर इंतजामों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन ने भी कहा कि उपविधियों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, काशीपुर आत्महत्या मामला, विनीत त्यागी हिरासत मौत, ऋषिकेश में जमीन विवाद और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस विवाद को हवा दे रहा है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के विरोध को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कुंभ मेला और हर-की-पौड़ी जैसे धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में सनातन धर्म की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध धार्मिक या सांस्कृतिक चिंता से नहीं, बल्कि राजनीतिक मंशा से प्रेरित है।

भट्ट ने यह भी कहा कि हरिद्वार के कुछ पवित्र क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर नियम कोई नई बात नहीं है और दशकों से परंपरागत रूप से इसका पालन होता रहा है। उनके अनुसार, धार्मिक नेताओं और स्थानीय पुरोहित समाज द्वारा तय की गई परंपराओं का सभी को सम्मान करना चाहिए।

यह समानता के अधिकार का उल्लंघनः ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मामले पर कहा कि इस तरह के कदम संविधान के खिलाफ हैं। उन्होंने इसे छुआछूत का एक रूप बताते हुए कहा कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। ओवैसी के मुताबिक, धार्मिक अनुष्ठान किसी एक आस्था के लोग करते हैं, लेकिन किसी क्षेत्र में दूसरे धर्म के लोगों के प्रवेश पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि समाज को इस दिशा में ले जाकर आखिर क्या हासिल किया जाएगा और ऐसे कदम हिंदू धर्म को किस ओर ले जाएंगे।

समाजवादी पार्टी ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आईएएनएस से कहा कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन देश को बांटने की राजनीति कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह सोच हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन समुदायों की एकता के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद त्योहारों तक पर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं। फखरुल हसन चांद ने कहा कि असली सवाल यह है कि भाजपा और उसके सहयोगी संगठन लोगों को मिल-जुलकर त्योहार मनाने और परंपराओं का सामंजस्य बनाए रखने से क्यों रोकना चाहते हैं, और इसके पीछे कहीं न कहीं वोट बैंक की राजनीति काम कर रही है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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