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हमास हथियार छोड़ने के ट्रंप की योजना पर सहमत, क्या अब गाजा में जंग खत्म होगी?

हमास ने घोषणा की है कि उसने इजराइल के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। इस समझौते में हमास के हथियारों को जमा कराने और गाजा से इजराइली सेना की चरणबद्ध तरीके से वापसी के प्रावधान हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी दावा किया है कि काहिरा में हुई अहम वार्ता के दौरान मध्यस्थों ने एक ‘ऐतिहासिक समझ’ हासिल की है।

इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा आधार यह है कि हमास और गाजा में सक्रिय दूसरे सशस्त्र संगठनों का चरणबद्ध तरीके से निरस्त्रीकरण होगा, जबकि उसी के समानांतर इजराइली सेना भी धीरे-धीरे गाजा से पीछे हटेगी। इसके बाद वहां नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाएगी, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात होगा और युद्ध से तबाह गाजा के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।

ये ताजा घटनाक्रम अक्टूबर में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए संघर्ष-विराम के लगभग नौ महीने बाद सामने आया हैं। हालांकि यह घोषणा जितनी बड़ी है, उतने ही बड़े सवाल भी इसके साथ जुड़े हैं। इजराइल ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस योजना का समर्थन नहीं किया है, जबकि हमास ने साफ कर दिया है कि उसकी सहमति तभी मायने रखेगी, जब इजराइल भी अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी करेगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा प्रस्ताव क्या है, इसमें किसे क्या करना होगा और क्या यह वास्तव में गाजा युद्ध को खत्म कर सकता है?

काहिरा से शुरू हुई नई कूटनीतिक पहल

इस नई पहल की शुरुआत मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई, जहां हमास के प्रतिनिधियों के साथ मिस्र, कतर और तुर्किये के मध्यस्थों ने कई दौर की बातचीत की। इन वार्ताओं का मकसद ट्रंप की व्यापक गाजा शांति पहल के दूसरे चरण को आगे बढ़ाना था।

पूरी बातचीत ट्रंप द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के प्रस्तावों के आधार पर हुई। युद्धविराम के बाद ट्रंप द्वारा बनाए गए इस अंतरराष्ट्रीय निकाय का काम केवल संघर्ष समाप्त करना नहीं, बल्कि युद्ध के बाद गाजा में नई प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना और पुनर्निर्माण की निगरानी करना भी है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘आज बोर्ड ऑफ पीस ने गाजा में हमास और अन्य सभी सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता किया है।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हथियारों का समर्पण एक साथ नहीं होगा, बल्कि कई चरणों में पूरा किया जाएगा। उनके अनुसार, यह व्यवस्था गाजा में एक नई फिलिस्तीनी सरकार के गठन की नींव रखेगी और साथ ही इजराइल की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का भी समाधान करेगी। ट्रंप ने दावा किया कि भविष्य में गाजा अब आतंकवादी हमलों का अड्डा नहीं रहेगा।

व्हाइट हाउस ने इस घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि अभी केवल राजनीतिक समझ बनी है। इसे जमीन पर लागू करने और उसकी निगरानी की प्रक्रिया अभी बाकी है। अधिकारियों ने माना कि वास्तविक बदलाव दिखने में अभी काफी समय लगेगा।

आखिर इस प्रस्ताव में है क्या?

समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन बातचीत में शामिल अधिकारियों ने इसके प्रमुख हिस्सों की जानकारी दी है। इस पूरे प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें किसी एक पक्ष को पहले कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं किया गया है। हमास का निरस्त्रीकरण और इजराइली सेना की वापसी, दोनों प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय निगरानी में एक साथ आगे बढ़ेंगी।

ट्रंप के मुताबिक, समझौते को बेहद व्यवस्थित चरणों में लागू किया जाएगा। जैसे-जैसे हमास हथियार छोड़ेगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना गाजा से पीछे हटेगी। इसके बाद इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस मिलकर गाजा की सुरक्षा संभालेंगे, ताकि वहां रहने वाले लोगों और पड़ोसी देशों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ट्रंप की व्यापक 20 सूत्रीय शांति योजना केवल हथियार जमा कराने तक सीमित नहीं है। इसमें हमास की सैन्य क्षमता खत्म करने, उसके पूरे सुरंग नेटवर्क को ध्वस्त करने, हथियारों के भंडार नष्ट करने, हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को बंद करने, गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, बोर्ड ऑफ पीस की निगरानी में नागरिक फिलिस्तीनी प्रशासन स्थापित करने, नई फिलिस्तीनी पुलिस बनाने, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और युद्ध से तबाह गाजा के पुनर्निर्माण जैसे बेहद अहम और मुश्किल लक्ष्य शामिल हैं।

योजना के मुताबिक, गाजा पर शासन करने में हमास की भूमिका समाप्त कर उसकी जगह तकनीकी विशेषज्ञों वाला फिलिस्तीनी प्रशासन बनाया जाएगा। इसके लिए नेशनल कमेटी फॉर एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) नाम की संस्था बनाई गई है, जो बदलाव के चरण के दौरान धीरे-धीरे नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेगी।

ट्रंप की घोषणा के बाद बोर्ड ऑफ पीस ने भी पुष्टि की कि हमास ने इस विस्तृत कार्यान्वयन रोडमैप को स्वीकार कर लिया है। गाजा मामलों के लिए ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि निकोलाय मलादेनोव ने कहा कि इस प्रक्रिया का लक्ष्य ऐसा गाजा बनाना है जिसका पुनर्निर्माण हो चुका हो, जहां फिलिस्तीनी शासन करें और जो इजराइल के साथ शांति से रहे। उनके अनुसार, इससे इजराइल-फिलिस्तीन विवाद के स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा भी खुल सकती है।

हालांकि इतनी महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए धन कहां से आएगा, इसका प्रबंधन कौन करेगा और युद्ध समाप्त होने के बाद इतनी बड़ी पुनर्निर्माण परियोजना को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से कैसे चलाया जाएगा। इन सवालों पर फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

हमास की हामी और एक बड़ी शर्त भी

हमास इस प्रस्ताव को अंतिम समझौता नहीं, बल्कि एक प्रारूप मान रहा है। उसका कहना है कि इसका क्रियान्वयन पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि इजराइल अपनी प्रतिबद्धताओं को किस तरह निभाता है।

समाचार रॉयटर्स के अनुसार हमास के एक सूत्र ने बताया कि प्रस्ताव के मुताबिक भारी हथियार तुरंत खत्म नहीं किए जाएंगे। उन्हें भविष्य में बनने वाले फिलिस्तीनी प्रशासन के अधिकार में रखा जाएगा। इन हथियारों को इजराइल को भी नहीं सौंपा जाएगा। हमास के वार्ता दल के सदस्य गाजी हमद ने भी अल जजीरा से साफ कहा कि गाजा से इजराइली सेना की वापसी से पहले हम निरस्त्रीकरण के संबंध में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

गाजी हमद के मुताबिक अगले लगभग 14 दिनों तक समझौते के हर तकनीकी पहलू पर बातचीत होगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि समझौता कब और किस तरीके से लागू होगा और उसकी निगरानी कैसे की जाएगी।

इजराइल अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं!

ट्रंप की घोषणा के बावजूद सबसे बड़ी चुनौती इजराइल का रुख है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने समझौते की जानकारी दी, तब तक इजराइली सरकार ने इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।

यही नहीं, ट्रंप की घोषणा से पहले एक इजराइली अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था कि इजराइल पहले ही इस प्रस्ताव के एक संस्करण को खारिज कर चुका है, क्योंकि वह उसकी लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा संबंधी मांगों को पूरा नहीं करता।

इजराइल का कहना है कि किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया से पहले हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण, गाजा से सभी हथियारों को हटाना और पूरे इलाके का पूर्ण सैन्यीकरण समाप्त होना जरूरी है। अधिकारी के मुताबिक, जिस 15 सूत्रीय दस्तावेज पर चर्चा हुई, वह इन मांगों का संतोषजनक जवाब नहीं देता और इजराइल ने अपनी आपत्तियां पहले ही दर्ज करा दी हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि इजराइल को हमास के इरादों पर गहरा संदेह है। उनके अनुसार, वार्ता के दौरान इजराइली प्रतिनिधियों से लगातार सलाह-मशविरा किया गया, लेकिन वे अब भी आश्वस्त नहीं हैं कि हमास वास्तव में अपने हथियार छोड़ देगा। इसके बावजूद वॉशिंगटन को उम्मीद है कि समझौता लागू हो सकता है।

वैसे बता दें कि इसी सप्ताह ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में मुलाकात भी हुई। फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी।

पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा?

बोर्ड ऑफ पीस के अधिकारियों के मुताबिक, हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण, सुरंगों को खत्म करने और सैन्य ढांचे को समाप्त करने की पूरी प्रक्रिया में 200 से 350 दिन यानी करीब एक साल भी लग सकते हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसे अंतिम समय-सीमा नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, पूरी प्रक्रिया जमीनी हालात पर निर्भर करेगी।

फिलहाल शुरुआती चरण अपेक्षाकृत छोटा माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, गाजा पुलिस करीब दो सप्ताह के भीतर अपने हथियार बोर्ड ऑफ पीस समर्थित फिलिस्तीनी प्रशासन को सौंपना शुरू कर सकती है। हालांकि यह केवल पुलिस के हथियार होंगे। इसमें हमास के मुख्य सैन्य हथियार शामिल नहीं हैं।

क्या युद्ध खत्म हो जाएगा?

इस जंग की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा दक्षिणी इजराइल पर किए गए हमले से हुई थी। इजराइली अधिकारियों के अनुसार, उस हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जो लगभग तीन वर्षों से जारी है।

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 73 हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनकी मौत पिछले साल युद्धविराम लागू होने के बाद हुई। दूसरी ओर, हमास ने अब तक अपने मारे गए लड़ाकों की संख्या सार्वजनिक नहीं की है।

इन सबके बावजूद यह प्रस्ताव अब तक का सबसे विस्तृत शांति प्रयास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार अमेरिका और हमास दोनों ने सार्वजनिक रूप से ऐसे ढांचे को स्वीकार किया है, जिसमें हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण, इजराइल की चरणबद्ध सैन्य वापसी, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था और नई फिलिस्तीनी सरकार की स्थापना को एक-दूसरे से जोड़ा गया है।

इसके बावजूद कई बड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं। साथ ही इजराइल ने भी अभी तक इस प्रस्ताव का सार्वजनिक तौर पर समर्थन नहीं किया है। ऐसे में देखना होगा कि समझौता फिलहाल कागज पर जितना महत्वाकांक्षी दिखता है, वह वास्तविक तौर पर कितनी सफल होती है। आने वाले दिनों और महीनों में इसका जवाब मिल जाएगा।

यह भी पढ़ें- सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने वाला आतंकवाद के आरोपों में दोषी करार, नवंबर में सुनाई जाएगी सजा

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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