बिगड़ती आर्थिक स्थिति और राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ की भारी गिरावट के कारण ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ जेन-जी का गुस्सा भड़क उठा है। बढ़ती महंगाई को लेकर बीते पांच दिनों से जारी जेन-जी के विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। इसमें कम से कम छह लोग मारे गए।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया या उन्हें जान से मारा गया, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका लॉक्ड एंड लोडेड (पूरी तरह मुस्तैद) है और प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए कदम उठाएगा।
ईरान में सड़कों पर क्यों उतरा जेन-जी
ईरान में ये विरोध प्रदर्शन रविवार से शुरू हुए थे, जब दुकानदारों और व्यापारियों ने रियाल की तेज गिरावट और बेकाबू महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरना शुरू किया। हालात जल्द ही कई प्रांतों में हिंसक हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंसक विरोध की लपटें अब ईरान के करीब 21 प्रांतों तक फैल चुकी हैं। पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान, फार्स, केरमानशाह, खुजेस्तान, हमदान और राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों से झड़पों और गिरफ्तारियों की खबरें आईं। अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, लोरेस्तान प्रांत में एक पुलिस स्टेशन पर हमला करने के बाद हुई झड़पों में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हुए।
फार्स और मानवाधिकार समूह हेंगॉ ने इससे पहले चारमहल और बख्तियारी प्रांत के लॉरदेगन शहर में भी मौतों की सूचना दी थी। अधिकारियों ने पश्चिमी शहर कुहदश्त में एक मौत की पुष्टि की, जबकि हेंगॉ ने इस्फहान प्रांत में एक अन्य प्रदर्शनकारी के मारे जाने का दावा किया। इसी बीच, बुधवार रात एक अलग प्रदर्शन के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की बसीज फोर्स के 21 वर्षीय स्वयंसेवक की मौत की खबर सामने आई। सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने मौत की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी। छात्र समाचार नेटवर्क ने स्थानीय प्रशासन के हवाले से प्रदर्शनकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
कुहदश्त शहर में हुई झड़पों के बाद स्थानीय अभियोजक काजेम नजरी ने बताया कि 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और फिलहाल शहर में शांति बहाल हो गई है। इसके बावजूद, हिंसा ने उस असंतोष को उजागर कर दिया है, जो वर्षों से आर्थिक दबाव झेल रहे ईरानी समाज में गहराता जा रहा है। राज्य टीवी ने बताया कि विरोध बढ़ने के बीच ईरान के केंद्रीय बैंक प्रमुख मोहम्मद रजा फर्जिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तेहरान के सआदी स्ट्रीट और ऐतिहासिक ग्रैंड बाज़ार के पास व्यापारियों के प्रदर्शन ने हालात की गंभीरता को और रेखांकित किया।
अमेरिका की चेतावनी पर ईरान ने क्या कहा?
अमेरिकी चेतावनी पर ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारिजानी ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दिया, तो इसका नतीजा पूरे क्षेत्र में अराजकता के रूप में सामने आएगा। उन्होंने ट्रंप के बयान को उकसावे वाला बताते हुए इसे अस्वीकार्य करार दिया।
आर्थिक संकट के बीच राजनीतिक असंतोष भी खुलकर सामने आने लगा है। ईरान की संसद के पूर्व स्पीकर और वरिष्ठ आलोचक मेहदी कर्रूबी ने सरकारी बजट में धार्मिक और सरकारी संस्थानों को दी जा रही भारी रकम की आलोचना की है। बीबीसी फारसी के मुताबिक, कर्रूबी ने इसे ‘राष्ट्रीय खजाने की लूट’ बताया और कहा कि गंभीर आर्थिक संकट और युद्ध जैसे हालात के बीच इस तरह का खर्च चौंकाने वाला है। उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से इन संस्थानों द्वारा किए जा रहे कथित लाभ-लोभ को रोकने की अपील की और कहा कि एक धर्मगुरु के तौर पर उन्हें जनता के सामने शर्म महसूस होती है।
इसी बीच, तेहरान में गुरुवार को बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए, जिनमें इजराइल और क़तर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर दोबारा हमले की धमकी दी गई। सरकारी मीडिया में जारी तस्वीरों में ‘यह फिर होगा’ जैसे संदेश दिखाए गए, जिनमें जून में हुए 12-दिवसीय युद्ध के दौरान निशाना बनाए गए ठिकानों को दर्शाया गया था। इनमें इजराइल का नेवातिम एयरबेस, हाइफा रिफाइनरी और कतर का अल-उदीद एयरबेस शामिल बताया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज होती जा रही है। इजराइल के विदेश मंत्रालय के फारसी भाषा वाले आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ने ईरान में खामेनेई शासन विरोधी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कई पोस्ट किए। ब्रिटेन के सांसद नाइजल फ़ाराज ने भी ‘आजादी की ताकतों’ के प्रति समर्थन जताते हुए ईरानी सरकार को ‘दुष्ट शासन’ करार दिया।
मौजूदा हालात 2022 के उस देशव्यापी आंदोलन की याद दिला दी है, जो महसा जीना अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद भड़का था। हालांकि, सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संवाद के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि रियाल की लगातार गिरावट के बीच उनके पास सीमित विकल्प हैं। फिलहाल एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है।
गौरतलब है कि ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में है। खासकर 2018 के बाद से, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। हालिया क्षेत्रीय तनाव और इजराइल के साथ संघर्ष ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि वह प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत को तैयार है, लेकिन ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सख्त चेतावनियों के बीच बातचीत की राह अब भी अनिश्चित बनी हुई है।

