पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय (Mukul Roy) का सोमवार तड़के निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। उनके बेटे शुभ्रांशु राय के अनुसार, लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे राय को देर रात लगभग डेढ़ बजे हृदयाघात हुआ और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
राय पिछले दो वर्षों से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। उन्हें पार्किंसन और स्मृतिलोप की बीमारी थी। हाल के महीनों में उनकी हालत और बिगड़ गई थी और वह अचेत अवस्था में थे। परिवार के मुताबिक वह परिचित चेहरों को पहचानने की क्षमता भी खो चुके थे और उन्हें नली के माध्यम से तरल आहार दिया जा रहा था। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को पार्थिव शरीर घर लाए जाने के बाद किया जाएगा।
कभी तृणमूल के दूसरे नंबर के नेता थे मुकुल रॉय
मुकुल राय ने 1998 में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। एक समय उन्हें पार्टी में दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाता था। 2011 में वाम मोर्चे को सत्ता से हटाने में उनकी रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही।
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में उन्होंने पहले पोत परिवहन राज्यमंत्री और बाद में 2012 में रेल मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
समय के साथ पार्टी नेतृत्व से उनके संबंधों में दूरी आई। शारदा और नारद प्रकरणों में नाम आने के बाद 2015 में उन्हें महासचिव पद से हटा दिया गया। 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
बंगाल में भाजपा को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली बड़ी सफलता के पीछे उनकी रणनीति को महत्वपूर्ण बताया गया। 2021 में वह भाजपा प्रत्याशी के रूप में कृष्णानगर से विधायक चुने गए।
हालांकि उसी वर्ष जून में उन्होंने फिर तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। उस समय ममता बनर्जी ने उन्हें परिवार का पुराना सदस्य बताते हुए स्वागत किया।
दल बदल के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर विवाद खड़ा हुआ। 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराया। इसके खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की गई। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और उन्हें अस्थायी राहत प्रदान की।
सुनवाई के दौरान उनके पक्ष में दलील दी गई कि दलबदल साबित करने के लिए जिन सामाजिक माध्यमों के संदेशों का आधार लिया गया, वे साक्ष्य कानून की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाणित नहीं थे। विरोधी पक्ष का कहना था कि दूसरी पार्टी से चुनाव जीतने के बाद सार्वजनिक रूप से मूल दल में लौटना अयोग्यता को आमंत्रित करता है।
राजनीतिक जगत में शोक
उनके निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। भाजपा नेता दिलीप घोष ने उन्हें अनुभवी राजनेता बताया और कहा कि पिछले दो तीन वर्षों से बीमारी के कारण वह सक्रिय राजनीति से दूर थे।
दिलीप घोष ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मुकुल राय बंगाल के वरिष्ठ नेता थे। वह तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। बंगाल की राजनीति में उनका अहम योगदान रहा। जब वह भारतीय जनता पार्टी में थे, तब उनके अनुभव का लाभ हमें भी मिला। बाद में उन्होंने कुछ परिस्थितियों के कारण पार्टी छोड़ी। वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और मुझे लगता है कि उनमें अभी भी बहुत कुछ करने की क्षमता थी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।”
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी गहरा दुख जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
अभिषेक बनर्जी ने मुकुल राय के निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, मुकुल राय का निधन बंगाल की राजनीतिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण दौर के अंत का संकेत है। वह लंबे अनुभव वाले वरिष्ठ नेता थे, जिनकी भूमिका ने राज्य के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन को आकार देने में अहम योगदान दिया।
अभिषेक बनर्जी ने आगे लिखा, तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक स्तंभों में शामिल मुकुल ने अपने शुरुआती वर्षों में संगठन को मजबूत करने और विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संगठनात्मक क्षमता को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा। मैं उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

