नई दिल्लीः चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार (14 मई) को 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तीसरे चरण का ऐलान किया है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को फिलहाल इस चरण से बाहर रखा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय जनगणना के तहत की जा रही आवास सूचीकरण कार्य के साथ इसे जोड़ा गया है। ऐसा करने का उद्देश्य दोनों ही प्रक्रियाओं में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी का कुशल उपयोग किया जा सके।
SIR के तीसरे चरण में शामिल होंगे 3.94 लाख बीएलओ
एसआईआर के तीसरे चरण में 3.94 लाख बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) हिस्सा लेंगे। ये बीएलओ घर-घर जाकर करीब 37.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन करेंगे।
चुनाव आयोग ने कहा कि इस चरण में राजधानी दिल्ली भी शामिल है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर को किया जाना है। चुनाव आयोग के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में द्वितीय चरण की मतगणना के बाद एसआईआर प्रक्रिया के लिए कार्यक्रम जारी किया जाएगा क्योंकि उच्च ऊंचाई और बर्फ से ढके इलाकों में मौसम संबंधी चुनौतियां अधिक हैं।
आयोग ने आगे कहा कि इन क्षेत्रों में परिचालन संबंधी बाधाओं और कठिन भूभाग की स्थिति के कारण कार्यक्रम स्थगित किया गया है। जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की तैनाती संभव होने पर इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस प्रक्रिया के शुभारंभ के दौरान कहा “मैं सभी मतदाताओं से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में उत्साहपूर्वक भाग लेने और अपने जनगणना प्रपत्र जमा करने की अपील करता हूं।”

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उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य केवल योग्य मतदाताओं को ही मतदाता सूची में शामिल करना है और अयोग्य मतदाताओं को हटाना है।
बिहार में हुआ था एसआईआर का पहला चरण
गौरतलब है कि एसआईआर का पहला चरण 2025 में शुरू हुआ था जब बिहार में चुनाव हुए थे। यह प्रक्रिया जून-सितंबर 2025 के बीच हुई थी। बिहार में सत्यापन के बाद लगभग 47 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए जो कुल मतदाताओं का लगभग 5-6 प्रतिशत था।
वहीं, दूसरे चरण की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इस दौरान नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया हुई। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत अन्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। पश्चिम बंगाल में 83.86 लाख नाम हटाए गए।
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गौरतलब है कि बंगाल में चुनाव के दौरान एसआईआर एक ज्वलंत मुद्दा बना था और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में दलील देने के राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंची थी। वहीं, तमिलनाडु और बिहार में भी इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। इसके लिए राजद और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने भी याचिकाएं दायर की थीं।

