Wednesday, April 8, 2026
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भारत के नालिया एयरबेस से इजराइली विमानों को दी गई मदद?, पाक हैंडलों से किए गए इस दावे की क्या है सच्चाई?

पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा से जुड़े कई अकाउंट्स द्वारा यह भ्रामक जानकारी फैलायी जा रही थी कि गुजरात के नालिया एयरबेस से इजरायली लड़ाकू विमानों को ईंधन और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया गया।

नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को धूमिल करने और क्षेत्रीय तनाव को हवा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक और ‘पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा’ का भंडाफोड़ हुआ है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि गुजरात स्थित भारतीय वायुसेना के बेस का इस्तेमाल इजराFली लड़ाकू विमानों द्वारा किया गया है। पीआईबी फैक्ट चेक इकाई ने इस दावे को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल हाल ही में पाकिस्तान प्रायोजित कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक भ्रामक और फर्जी दावा फैलाया। इन पोस्टों में कहा गया कि गुजरात के ‘नालिया एयरबेस’ ने उन इजराइली लड़ाकू विमानों को ईंधन और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की, जो कथित तौर पर ईरान के चाबहार बंदरगाह पर हमले में शामिल थे। हालांकि, आधिकारिक जांच में ऐसी किसी घटना के होने की पुष्टि नहीं हुई है।

इस भ्रामक जानकारी को योजनाबद्ध तरीके से वायरल किया गया ताकि भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास और चिंता का माहौल पैदा किया जा सके। प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने इस मामले की विस्तृत जांच के बाद स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घटना घटित ही नहीं हुई है।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारतीय वायुसेना के किसी भी ठिकाने या एयरबेस ने इजरायली विमानों को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं की है। यह सूचना केवल भ्रम फैलाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने के कुत्सित प्रयास का हिस्सा है।

आईएएनएस से बात करते हुए रक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकार की ‘फेक न्यूज’ रणनीतिक रूप से फैलाई जाती है। इसका मकसद न केवल देशों के बीच कूटनीतिक दरार पैदा करना होता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता को भी नुकसान पहुँचाना होता है। भारत की विदेश नीति हमेशा से पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों के प्रति जवाबदेही पर आधारित रही है। भारतीय वायुसेना एक पेशेवर और अनुशासित बल है, जो केवल आधिकारिक निर्देशों और संप्रभुता के दायरे में कार्य करता है।

सरकार ने नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी संवेदनशील जानकारी को साझा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें। बिना पुष्टि के खबरों को आगे बढ़ाना अनजाने में दुष्प्रचार का हिस्सा बनने जैसा है।

यदि आपको सरकार या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कोई संदिग्ध या भ्रामक जानकारी मिलती है, तो आप उसे तुरंत पीआईबी फैक्ट चेक व्हाट्सएप नंबर: 8799711259 के साथ ईमेल: pibfactcheck@gmail.com को रिपोर्ट कर सकते हैं।

ये भी पढ़ेंः सीजफायर के बीच ट्रंप का सख्त रुख- यूरेनियम संवर्धन पर पूरी रोक, टैरिफ-प्रतिबंधों में राहत पर होगी बातचीत

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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