केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान ने बताया कि उन्होंने अपने इस्तीफे का पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर लगातार दबाव सरकार पर बढ़ रहा था। प्रधान ने X पर शेयर किए गए एक पत्र में कहा कि पिछले दस दिनों में हुए घटनाक्रम से उन्हें दुख हुआ है और यह निर्णय देश की एकता के हित में लिया गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर छात्रों के पिछले करीब एक महीने से जारी प्रदर्शन और आंदोलन के बाद प्रधान का इस्तीफा आया है। सीजेपी की मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। सीजेपी की ओर से शनिवार सुबह यह साफ किया गया था कि अगर सरकार प्रधान के इस्तीफे से इनकार करती है तो कोई बातचीत नहीं होगी। आज तीसरे दौर की बैठक होने वाली थी। बहरहाल अब प्रधाने के इस्तीफे से सरकार ने प्रदर्शनकारियों की सभी मांगों को पूरा कर दिया है।
सीजेपी की तीन मांगे थी। इसमें एक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरा- प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं करने की बात थी। तीसरी मांग नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजे की थी। यह साफ हो गया था कि केंद्र ने दो मांगे शुक्रवार को मान ली थी लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार चुप थी।
सीजेपी का आंदोलन पिछले महीने के आखिर में शुरू हुआ था। हालांकि, 20 जुलाई को सीजेपी ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प ने पूरे आंदोलन को और तेज कर दिया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए एक्स पर साझा पत्र में प्रधान ने कहा, ‘मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और न्यायोचित अपेक्षाओं का बहुत सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझे उनके दूरदर्शी नेतृत्व में देश की सेवा करने का मौका दिया।’
प्रधान ने इसी पत्र में आगे कहा, ‘मेरा संकल्प है कि हम देश की युवा शक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘इस बात को ध्यान में रखते हुए कि जंतर-मंतर और पूरे देश में बनी स्थिति का फायदा देश-विरोधी ताकतें न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे, भारत के किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फँसे, और हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएँ और अपना करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।’
जंतर-मंतर पर जश्न
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर जैसे ही आई, जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल बन गया। इस्तीफे की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी ने पोस्ट किया- ‘छात्र शक्ति जिंदाबाद।’ वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर के मंच से प्रधान के इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा, ‘हमने कर दिखाया।’
दिपके ने कहा, ‘वे कहते थे कि इस सरकार में कोई इस्तीफा नहीं होता। लेकिन हमने कर दिखाया। हम कहते हैं झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।’
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में देश के दर्जनों शहरों में फैला छात्र विरोध प्रदर्शन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। विपक्षी पार्टियां भी आंदोलन के साथ होती नजर आईं सरकार को घेरते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी थी।

