दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास स्थित फैजे इलाही मस्जिद के निकट अतिक्रमित भूमि पर बुधवार देर रात दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने तोड़फोड़ अभियान चलाया। तुर्कमान गेट पर मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन पर अवैध निर्माण हटाने के लिए नगर निगम के करीब 300 अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे थे। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर एमसीडी ने 17 बुलडोजर से यहां बने बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर, दुकानों को ध्वस्त कर दिया।
हालांकि एमसीडी की इस कार्रवाई से इलाके में तनाव फैल गया। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और आरोप है कि कुछ लोगों ने पत्थरबाजी भी की। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए, जिसके बाद स्थिति को काबू में किया जा सका।
यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के एक दिन बाद हुई, जिसमें शहरी विकास मंत्रालय, एमसीडी और दिल्ली वक्फ बोर्ड से इस मामले में जवाब मांगा गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला विचार योग्य है और संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।
वीडियो में दिखी तोड़फोड़, 5 पुलिसकर्मी घायल
इलाके के निवासियों के व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किए गए वीडियो में बुलडोजर और अर्थ-मूवर मशीनों को सौ साल से अधिक पुरानी मस्जिद के कुछ हिस्सों को गिराते हुए देखा गया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था।
कुछ अन्य वीडियो में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले दागे जाने और कुछ लोगों द्वारा सुरक्षाबलों पर पथराव किए जाने के दृश्य भी सामने आए। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना में कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। डीसीपी निधिन वाल्सन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि रात में पुलिस पर पथराव किया गया। हालात को काबू में करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। पूरी प्रक्रिया सामान्य रही। सीसीटीवी, ग्राउंड फुटेज और बॉडी कैमरा फुटेज मिलने के बाद उपद्रवियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस सीसीटीवी फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग के आधार पर पत्थरबाजी में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक चार से पांच संदिग्धों की पहचान कर ली गई है। मामले में दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक दस लोगों को हिरासत में लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर मधुर वर्मा ने बताया कि तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हालात को समझदारी और न्यूनतम बल प्रयोग के साथ तुरंत काबू में कर लिया गया, जिससे किसी तरह की बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी न्यायिक निर्देशों को कानूनी, पेशेवर और संवेदनशील तरीके से लागू किया जाए।

मामला क्या है?
मस्जिद सैयद फैजे इलाही की प्रबंध समिति ने एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में कहा गया था कि 0.195 एकड़ भूमि से बाहर बने सभी ढांचे अतिक्रमण हैं और इन्हें गिराया जाएगा। एमसीडी का दावा है कि मस्जिद समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड ने भूमि के स्वामित्व या वैध कब्जे से जुड़े कोई दस्तावेज पेश नहीं किए। हालांकि, 0.195 एकड़ भूमि पर ही मस्जिद स्थित है।
यह आदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 12 नवंबर 2025 के फैसले के बाद आया था, जिसमें एमसीडी और पीडब्ल्यूडी को तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान क्षेत्र में 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। इन अतिक्रमणों में सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल थे।
यह आदेश ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था, जिसकी पैरवी अधिवक्ता उमेश चंद्र शर्मा ने की।
अक्टूबर 2025 में प्रशासन ने संयुक्त सर्वे भी किया था, जिसमें जमीन पर अतिक्रमण पाए जाने की पुष्टि हुई। कुछ हिस्से सार्वजनिक विभागों के स्वामित्व के बताए गए।
नोटिस जारी होने के बाद 4 जनवरी को एमसीडी के अधिकारी अतिक्रमित हिस्सों की निशानदेही करने पहुंचे थे, जहां स्थानीय लोगों के विरोध के चलते अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
मस्जिद समिति का पक्षमस्जिद की प्रबंध समिति ने एमसीडी के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए कहा है कि यह संपत्ति उनके उपयोग में है और वे इसके लिए दिल्ली वक्फ बोर्ड को लीज़ का किराया देते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह भूमि वक्फ अधिनियम के तहत अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और इससे जुड़े विवादों की सुनवाई का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को है। समिति के वकील के अनुसार, उनकी मुख्य आपत्ति जमीन पर चल रहे कब्रिस्तान को लेकर है।

