नई दिल्लीः आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालती कार्यवाही के वीडियो प्रकाशित करने के लिए अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अदालत में उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिका में केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी (आप) के कई नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में आरोप है कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो अवैध तरीके से रिकॉर्ड किए गए और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी थी दलील
गौरतलब है कि बीते दिनों अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता के समक्ष स्वयं दलील दी थी। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो प्रकाशित किया गया। इसी को लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में केजरीवाल और रवीश कुमार के अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पुरंदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके साथ ही वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेजस कारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई 22 अप्रैल को कर सकती है।
इससे पहले हाई कोर्ट प्रशासन ने भी दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर अदालत की कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया इसके प्रकाशन के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। इसमें जस्टिस शर्मा के समक्ष केजरीवाल की बहस के वायरल वीडियो भी शामिल थे।
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इससे पहले अधिवक्ता वैभव सिंह ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें केजरीवाल और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, इस याचिका में सिंह ने कहा कि केजरीवाल ने “न्याय के इस मंदिर और जस्टिस सुश्री स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ बिना किसी आधार के माननीय न्यायालय के समक्ष कई तुच्छ, निंदनीय और भ्रामक दलीलें पेश कीं।”
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई से हटने से किया था इंकार
इससे पहले सोमवार (20 अप्रैल) को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी नीति से जुड़े मामले में सुनवाई से हटने से इंकार कर दिया था। इसको लेकर अदालत में अरविंद केजरीवाल द्वारा याचिका दायर की गई थी।
जस्टिस शर्मा ने 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में कहा कि न्याय दबाव के आगे नहीं झुकता और न्यायपालिका के लिए निष्पक्षता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है, इस पर जोर दिया।
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गौरतलब है कि केजरीवाल ने शराब नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका की सुनवाई से उन्हें को हटाने की मांग की थी। केजरीवाल ने इस बात का हवाला दिया था कि उन्हें “गंभीर, वास्तविक और उचित आशंका” है कि उनके समक्ष कार्यवाही निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हो सकती है।

