नई दिल्ली: फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े साजिश मामले में आरोपी पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) पार्षद ताहिर हुसैन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख जुलाई में निर्धारित की है।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की अवकाशकालीन पीठ ने ताहिर हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब दाखिल करने को कहा। ताहिर ने कड़कड़डूमा स्थित ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 1 जून को जस्टिस अमित शर्मा ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। जिसके बाद याचिका को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया।
ताहिर की पहले भी जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। जनवरी में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की थी। मार्च में अदालत ने उन्हें चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम राहत प्रदान की थी।
हुसैन ने अपनी याचिका में बताया था कि वह इनगुइनल हर्निया से पीड़ित हैं और उन्हें सर्जरी की आवश्यकता है। अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर उनकी सर्जरी कराने और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
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दिल्ली दंगाः ताहिर हुसैन पर क्या-क्या आरोप हैं?
ताहिर हुसैन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की कथित साजिश रचने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों और हिंसा से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि दंगों के दौरान हिंसा भड़काने और उसे संगठित रूप देने में उनकी भूमिका थी।
ताहिर हुसैन का नाम भारतीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में भी सामने आया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा अपने कार्यालय से लौटने के बाद घर के पास सामान लेने निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।
ईडी जांच में क्या आया?
दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में ताहिर हुसैन के खिलाफ दंगों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी लगाए गए हैं। इस मामले में सह-आरोपी अमित गुप्ता सरकारी गवाह बन चुके हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि दंगों के दौरान इस्तेमाल की गई कथित आर्थिक व्यवस्था और धन के स्रोतों की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यापक हिंसा भड़क उठी थी। दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह राष्ट्रीय राजधानी के हालिया इतिहास की सबसे गंभीर सांप्रदायिक हिंसाओं में से एक मानी जाती है।

