नई दिल्ली: वीडी सतीशन केरल के नए मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी गई। केरल चुनाव के नतीजे आने के 10 दिन बार आखिरकार गुरुवार को सीएम को लेकर सस्पेंस खत्म हुआ। पिछले कई दिनों से पार्टी में सीएम पद को लेकर अंदरुनी खींचतान की खबरें आ रही थी। कांग्रेस नेतृत्व ने हालांकि आखिरकार वीडी सतीशन पर सहमति जताई। सतीशन केरल के 13वें मुख्यमंत्री होंगे।
सीएम का फैसला तिरुवनंतपुरम में आयोजित कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में पार्टी हाई कमान से परामर्श के बाद लिया गया। सतीशन का नाम केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के साथ मुख्यमंत्री पद की दौड़ में प्रमुख दावेदारों में शामिल था। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने सतीशन के नाम का ऐलान दिल्ली में किया, जिसमें प्रमुख रूप से दीपा दासमुंशी, मुकुल वासनिक और अजय माकन शामिल रहें।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने हाल में हुए केरल विधानसभा चुनावों में 140 में से 102 सीटें जीतकर मजबूत जनादेश प्राप्त किया है। 10 साल तक विपक्ष में बैठने के बाद यूडीएफ की सत्ता में वापसी हुई है। दूसरी ओर एलडीएफ चुनावों में इस बार 35 सीटों पर सिमट गया।
केरल को लेकर 10 दिनों से जारी था सस्पेंस
केरल में सीएम नाम के फैसले को पिछले कई दिनों टाला जा रहा था। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल अंतिम दौर की चर्चाओं के दौरान दिल्ली में मौजूद थे। उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा था। हालांकि, अंदरखाने उनके नाम पर विरोध भी थे। सूत्रों के मुताबिक नेतृत्व का फैसला बताने से पहले उन्हें राहुल गांधी के साथ बैठक के लिए बुलाया गया। इस बीच, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को भी राहुल गांधी का निजी फोन आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि अब फैसला हो चुका है और सतीशन को मंजूरी मिल गई है।
बहरहाल, पार्टी में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल ने पार्टी के फैसले पर भरोसा जताया है। अलप्पुझा से लोकसभा सांसद वेणुगोपाल ने सतीशन के पक्ष में घोषणा होने के बाद कहा, ‘मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। मैं हाई कमान के फैसले के साथ खड़ा रहूंगा।’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं सतीशन को केरल के मुख्यमंत्री चुने जाने पर बधाई देता हूं और उन्हें व यूडीएफ सरकार को पूरा समर्थन दूंगा।’
बता दें कि केरल में मुख्यमंत्री के चयन में हुई देरी ने कर्नाटक की स्थिति की याद दिला दी थी, जहां मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी खींचतान चली थी। यह खींचतान और दोनों नेताओं और उनके समर्थकों के बीच तनाव अब भी कई बार सामने आता रहता है।
वीडी सतीशन के बारे में जानिए
कोच्चि जिले में जन्मे सतीशन इस महीने के आखिर में 62 साल के होने जा रहे हैं। पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के तेज और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बनाई।
आंकड़ों, तीखे व्यंग्य और दमदार बोलने के अंदाज के कारण सतीशन वामपंथी दलों के लिए बड़ी चुनौती बने रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की बड़ी हार के बाद सतीशन को विपक्ष का नेता चुना गया था। शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें अंदरूनी खींचतान के बीच एक समझौता उम्मीदवार माना था। हालांकि, सतीशन ने इस जिम्मेदारी को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का बड़ा मौका बना लिया।
सोने की तस्करी का मामला हो, एआई कैमरे से जुड़े आरोप हों या कानून-व्यवस्था को लेकर विजयन सरकार पर लगातार हमले, सतीशन ने खुद को केरल में वामपंथी सरकार के खिलाफ सबसे प्रमुख और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया। सतीशन की एक खूबी यह भी रही है कि वे पार्टी के अंदर की गुटबाजी से अलग नजर आए हैं।
पार्टी के भीतर उनके आलोचक उन पर फैसले लेने की शक्ति अपने पास रखने और कभी-कभी जल्दबाजी में राजनीतिक फैसले लेने का आरोप लगाते हैं। फिर भी, उनके विरोधी भी मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व में इस समय सतीशन का जनता से सबसे मजबूत जुड़ाव है।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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