देश में ईंधन की कीमतों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार हो रहे इजाफे के बाद अब सीएनजी (CNG – कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस ताजा वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सीएनजी की नई दरें ₹83.09 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं। नई दरें आज से ही प्रभावी हो चुकी हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आए व्यवधान के बीच पिछले 15 दिनों से भी कम समय में सीएनजी की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह ताजा संशोधन सीएनजी के दामों में हुई पिछली बढ़ोतरी (1 रुपया प्रति किलो) के महज तीन दिन बाद ही कर दिया गया है।
सीएनजी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। सोमवार को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ। बीते दो हफ्तों में यह चौथी वृद्धि थी।
15 मई से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। यह 2022 के बाद पहली बार है जब राजधानी में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार गया है। वहीं डीजल की कीमत 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
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क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसके चलते दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद जैसी स्थिति में पहुंच गया है।
दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण इस इलाके में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां केवल मौजूदा घाटे की भरपाई ही नहीं कर रहीं, बल्कि पुराने नुकसान की भी रिकवरी कर रही हैं। इसी वजह से आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, 15 मई को पहली कीमत वृद्धि से पहले तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। हालांकि कीमतें बढ़ने के बाद यह घाटा घटकर 600 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रह गया है।
भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है, जिसके कारण वैश्विक कीमतों का सीधा असर देश पर पड़ता है। इसके बावजूद सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल 7 से 7.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।
गौरव वल्लभ ने दावा किया कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में काफी अधिक वृद्धि हुई है। उनके अनुसार अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान और कनाडा जैसे देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 40 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कीमतों में वृद्धि का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया है ताकि आम जनता पर अत्यधिक बोझ न पड़े।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियों, दूध, खाद्यान्न और रोजमर्रा की जरूरतों के सामान भी महंगे हो सकते हैं। सीएनजी महंगी होने से ऑटो और कैब किराए बढ़ने की भी संभावना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में लोगों की जेब पर और ज्यादा बोझ पड़ सकता है।

