Homeभारतपहाड़ों पर बारिश बनी आफत: J&K और हिमाचल में बादल फटने से...

पहाड़ों पर बारिश बनी आफत: J&K और हिमाचल में बादल फटने से तबाही, सड़कें बह गईं, हाईवे बंद; सैकड़ों पर्यटक फंसे

पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश से संकट खड़ा हो गया है। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले और हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से भारी तबाही हुई है।

शिमला/जम्मू: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले और हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में मंगलवार बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) की खबर है। बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। कई सड़कों पर मलबा और कीचड़ भर गया, संपर्क मार्ग टूट गए और कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। वहीं, हिमाचल में मनाली-लेह और मनाली-जांस्कर मार्ग पूरी तरह बंद होने से सैकड़ों पर्यटक बीच रास्ते में फंस गए हैं।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा इलाके में मंगलवार सुबह बादल फटने के बाद तेज बहाव के साथ आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आया, जिससे कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और दूर-दराज के गांवों का संपर्क टूट गया।

प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है। प्रभावित इलाकों में सड़कें साफ करने और नुकसान का आकलन करने का काम जारी है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से फिलहाल पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा टालने की अपील की है।

मचैल माता और मिंधल माता यात्रा पर रोक

खराब मौसम, फ्लैश फ्लड और लगातार भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने किश्तवाड़ जिले की मचैल माता यात्रा और मिंधल माता यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे फिलहाल यात्रा शुरू न करें और किसी भी नए निर्देश के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क बनाए रखें।

डोडा से सटे किश्तवाड़ जिले में पिछले वर्ष भी चाशोटी गांव के पास बादल फटने से भीषण तबाही हुई थी। उस हादसे में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के दो जवानों सहित 45 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 167 लोग घायल हुए थे। इसके अलावा 220 से अधिक लोग लापता हो गए थे।

यह हादसा मचैल माता यात्रा मार्ग पर हुआ था, जहां गुलाबगढ़ से माता चंडी धाम की ओर जा रहे श्रद्धालु अचानक आई बाढ़ की चपेट में आ गए थे। मलबे से भरे पानी ने घरों और यात्रियों के अस्थायी शिविरों को भी अपनी चपेट में ले लिया था।

हिमाचल में भी बादल फटा, मनाली-लेह हाईवे बंद

उधर, हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के जिस्पा (Jispa) क्षेत्र में भी बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने मनाली-लेह और मनाली-जांस्कर मार्गों को पूरी तरह बंद कर दिया है।

भारी जलप्रवाह और मलबे के कारण दोनों राष्ट्रीय मार्गों पर यातायात रोक दिया गया है। पुलिस ने केलोंग से आगे वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है, जबकि लेह की ओर से आने वाले वाहनों को भी पहले ही रोक दिया गया है ताकि पर्यटकों को और परेशानी न हो। इस घटना के कारण सैकड़ों पर्यटक रास्ते में फंस गए हैं।

सड़कों से मलबा हटाने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। युद्ध स्तर पर सड़क बहाली का काम जारी है ताकि यातायात जल्द शुरू कराया जा सके।

हिमाचल पुलिस ने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि अगले आदेश तक मनाली-लेह और मनाली-जांस्कर मार्ग पर यात्रा न करें। किसी भी आपात स्थिति में 112 नंबर पर संपर्क करने को कहा गया है।

ग्लेशियर पिघलने से भी बढ़ा खतरा, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

इससे पहले सोमवार शाम भी जिस्पा नाले में ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण अचानक जलस्तर बढ़ गया था, जिससे फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बन गई और मनाली-लेह हाईवे चार घंटे से अधिक समय तक बंद रहा। लाहौल घाटी के झालमा नाले में भी भारी मलबा जमा हो गया था। बीआरओ ने वहां अस्थायी पुलिया बनाकर लोगों की आवाजाही शुरू कराई है।

लाहौल-स्पीति प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए नदियों और नालों के किनारे न जाने की सलाह दी है। जिला उपायुक्त किरण भडाना ने कहा कि घाटी में ग्लेशियर तेजी से पिघलने के कारण नदियों और नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और बीआरओ को संवेदनशील स्थानों पर मशीनरी तैनात रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मलबा हटाकर सड़कें जल्द खोली जा सकें।

क्यों फटते हैं बादल?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बादल फटने की घटना तब होती है जब नमी से भरी गर्म हवाएं पहाड़ों से टकराकर तेजी से ऊपर उठती हैं। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तापमान अचानक गिरने से जलवाष्प तेजी से संघनित होकर अत्यधिक घने बादलों का निर्माण करती है। इसके बाद बेहद कम समय में सीमित क्षेत्र में अत्यधिक बारिश होती है, जिससे फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाएं घटित होती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह की चरम मौसमी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

1970 के बाद दुनिया में दोगुने से ज्यादा हुए उमस वाले दिन, भारत सबसे ज्यादा जोखिम वाले देशों में शामिल!

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular