रायपुरः छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य विशेष जोनल समिति (डीकेएसजेडसी) से जुड़े कुल 108 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें 44 महिलाएं शामिल हैं। इन माओवादियों ने बुधवार (11 मार्च) को बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में उच्च अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंग ने कहा कि ” आत्मसमर्पण करने वाले समूह में उच्च पदों के कई अधिकारी, डिविजनल समिति के 5 सदस्य, पीएलजीए कंपनी के 2 कमांडर, 15 प्लाटून पार्टी समिति के सदस्य और क्षेत्र समिति के 21 सदस्य शामिल हैं। सामूहिक रूप से इन सभी पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम था। “
सुरक्षाबलों ने बरामद किए भारी मात्रा में हथियार
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर, सुरक्षा बलों ने लक्षित अभियान चलाए, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार और संपत्ति बरामद हुई। एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, सुरक्षा बलों ने 3.61 करोड़ रुपये नकद और लगभग 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलोग्राम सोना बरामद किया, जिसे अधिकारियों ने देश में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी बताया है।
यह अब तक के सबसे बड़े नक्सल सरेंडर में से एक है। इतनी बड़ी तादात में नक्सलियों का सरेंडर होना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘नक्सल मुक्त भारत अभियान’ की अहम कड़ी है। भारत सरकार ने 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ की डेडलाइन रखी है। आखिरी तारीख से पहले इतनी बड़ी तादात में नक्सलियों का आत्मसमर्पण मिशन की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
महासमुंद में माओवादियों ने किया था सरेंडर
इससे पहले, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 15 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। एक मार्च को इन आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस को हथियारों की खेप सौंपी, जिनमें 3 एके-47 राइफल, 2 एसएलआर (सेल्फ-लोडिंग राइफल) और 2 इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम राइफल शामिल थीं। इस समूह में नौ महिलाएं और छह पुरुष शामिल थे, जो ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद समिति से जुड़े थे।
वहीं, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जीपी सिंह ने पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) का दौरा कर जवानों को अभियान के अंतिम चरण के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड को नक्सलमुक्त बनाने के लिए 31 मार्च की समयसीमा तय है और सुरक्षा बलों को हर हाल में यह लक्ष्य हासिल करना है।
इस दौरान डीजी ने जवानों को जंगलों में ऑपरेशन के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए छिपे हुए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) सबसे बड़ा खतरा होते हैं, इसलिए सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि अभियान के दौरान ‘जीरो कैजुअल्टी’ का लक्ष्य सुनिश्चित किया जा सके।

