अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पिछले कई दिनों की चुप्पी तोड़ते हुए मंगलवार को कहा कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वे पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। मंगलवार को उनके नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने रामभक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि वह विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का क्रमवार जवाब देंगे।
राय ने कहा कि मंदिर के दानपात्रों में जमा नकदी की गिनती को लेकर उन पर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन ये सभी आरोप निराधार हैं। चंपत राय ने कहा, ‘मैं 1991 से अयोध्या में संगठन का कार्यकर्ता हूं और पिछले 45 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूं। जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी।’
चंपत राय ने पत्र में क्या कुछ कहा है?
चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा, ‘पिछले 7 जून 2026 से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्र की गणना के समय हुई चोरी के संबंध में अनेक प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। व्यक्तिगत रूप से मेरे ऊपर भी अनेक लोगों ने निराधार आरोप लगाए हैं। मैंने इस पूरे मामले पर मौन धारण कर लिया है।’
उन्होंने कहा, ‘मंदिर ट्रस्ट की जुलाई माह की सामान्य बैठक में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जो अब सार्वजनिक भी हो चुकी है। यह रिपोर्ट ‘परम गोपनीय’ थी।’
उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं आश्वस्त करता हूं कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद फैलाए जा रहे सभी बिंदुओं पर क्रमवार अपना उत्तर दूंगा। तब पूरा सत्य सभी के सामने आ जाएगा।’ साथ ही गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के अयोध्या कांड की चौपाई ‘धीरज धरम मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी’ भी शेयर की गई है।
मामले में अब तक आठ आरोपी हुए हैं गिरफ्तार
एफआईआर दर्ज होने के बाद चढ़ावा चोरी मामले में अब तक आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है और उनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है। हालांकि विपक्ष ने सवाल उठाया है कि चंपत राय को आरोपियों में शामिल क्यों नहीं किया गया है। उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की गई है।
बहरहाल, चंपत राय का ताजा बयान उस समय आया है, जब एक दिन पहले ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार किया है। उनके साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी SIT की प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के बाद ‘नैतिक आधार’ पर इस्तीफा दिया था।
हालांकि ट्रस्ट ने एक प्रस्ताव पारित कर राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में चंपत राय के ऐतिहासिक योगदान की सराहना भी की। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि चंपत राय ने संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है।
ट्रस्ट में बड़े बदलाव
ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया है। साथ ही मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में कई बड़े बदलावों की घोषणा की है। मंदिर ट्रस्ट के लिए एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय खोज समिति बनाई गई है। इस समिति में सेवानिवृत्त जज प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वरिष्ठ ट्रस्टी सुरेश हवारे शामिल हैं।
इसके अलावा ट्रस्ट ने कहा है कि वह SIT की सिफारिशों को लागू करने के साथ-साथ स्वतंत्र विशेषज्ञों की सलाह भी लेगा, ताकि मंदिर के प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर किया जा सके। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। तब तक SIT को कानूनी रूप से अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है, जिसमें कथित दान चोरी मामले से जुड़े पूरे वित्तीय लेनदेन और जांच के निष्कर्ष शामिल होंगे।
इस बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा है कि मंदिर की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि कार्यप्रणाली में सुधार करना आवश्यक है।
दान और आय से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से अब तक ट्रस्ट को लगभग 3,200 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च के बाद भी ट्रस्ट के पास करीब 1,800 करोड़ रुपये शेष हैं। उन्होंने कहा कि दान को लेकर जो भी भ्रम की स्थिति बनी थी, उसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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