पटनाः राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने पटना के सचिवालय थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। तेज प्रताप का आरोप है कि उनकी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष रेनू यादव उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपशब्द कह रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
क्यों शुरू हुआ विवाद? नौकरियों के बदले पैसे का आरोप
तेज प्रताप यादव के अनुसार, संतोष रेनू को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया था, लेकिन जल्द ही वे पार्टी की विचारधारा के खिलाफ काम करने लगे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संतोष ने कई लोगों से नौकरी दिलाने और अन्य काम करवाने के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूले। जब यह मामला पार्टी के संज्ञान में आया, तो अनुशासन समिति ने 14 दिसंबर को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। तेज प्रताप का दावा है कि इसी निष्कासन से बौखलाकर संतोष अब फेसबुक और यूट्यूब लाइव के जरिए उन्हें धमकियां दे रहे हैं।
गृह मंत्री सम्राट चौधरी से सुरक्षा की मांग
महुआ विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद अपनी नई राजनीतिक राह तलाश रहे तेज प्रताप ने इस मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने अपनी सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की मांग की है। शनिवार को सम्राट चौधरी ने पुष्टि की कि उन्हें पत्र मिल गया है और मामले की जांच की जा रही है। सचिवालय थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आपराधिक धमकी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संतोष रेनू ने आरोपों पर क्या कहा?
दूसरी ओर, संतोष रेनू यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में संतोष ने कहा कि ये आरोप झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने दावा किया कि विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने पार्टी के भीतर कुछ गलत फैसलों पर सवाल उठाए। संतोष का कहना है कि एक भाजपा नेता के भाई के निधन पर संवेदना व्यक्त करने के कारण उन पर भाजपा के साथ मिले होने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। वह भी हमारे जैसा सामान्य आदमी। हम चना बेचकर यहां तक आएं हैं। यह और बात है कि हम आप लोगों को नहीं पच रहे हैं।
गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव को इसी साल 25 मई को उनके पिता लालू प्रसाद ने आरजेडी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। यह कार्रवाई तब हुई थी जब एक कथित फेसबुक पोस्ट (जिसे बाद में उन्होंने हैक बताया था) के कारण परिवार और पार्टी की छवि पर सवाल उठे थे। आरजेडी से अलग होने के बाद उन्होंने ‘जयचंदों’ (गद्दारों) पर साजिश का आरोप लगाया था और अब वे जनशक्ति जनता दल के जरिए अपनी राजनीति कर रहे हैं।

