Friday, March 20, 2026
Homeभारतबिहार राज्य सभा चुनाव: कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास का दावा- पार्टी नेतृत्व...

बिहार राज्य सभा चुनाव: कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास का दावा- पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वोट नहीं डाला

मनोज विश्वास ने दावा किया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (राजेश राम) ने ‘हमें साफ कहा था कि वोट देना है या नहीं, इसका फैसला हम खुद कर सकते हैं।’

पटना: बिहार में राज्य सभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर विपक्ष के महागठबंधन में सबकुछ ठीक होने को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायकों ने वोट नहीं दिया था। इसमें मनोज विश्वास भी शामिल हैं। वोट नहीं देने की वजहों को लेकर अब आए उनके ताजा बयान ने सियासत को गरमा दिया है।

दरअसल, कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने वोट न देने के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार मनोज विश्वास ने कहा, ‘हमने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर चुनाव से अलग रहने का फैसला लिया। राजद ने उम्मीदवार तय करने से पहले हमारे नेतृत्व से कोई बातचीत नहीं की। जो उम्मीदवार दिया गया, वह हमारी विचारधारा के अनुरूप नहीं था।’

मनोज विश्वास ने यह भी कहा कि वे पूरी मजबूती के साथ अपनी पार्टी कांग्रेस के साथ खड़े हैं। वोट न देने वाले अन्य विधायकों का भी कहना है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देश के कहने पर ही यह निर्णय लिया। इस मुद्दे ने कांग्रेस के भीतर जातीय राजनीति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि पार्टी के अंदर अगड़ी-पिछड़ी की राजनीति हावी हो गई है, जिसका असर अब सामने दिख रहा है।

मनोज विश्वास ने क्या कुछ कहा?

मनोज विश्वास ने IANS से कहा, ‘जब हम बिहार में वोट मांगने जाते हैं तो हमारा वोट बैंक कौन है? अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग। लेकिन जिस उम्मीदवार को उतारा गया, उस पर हमारी पार्टी के साथ कोई तालमेल नहीं था।’

फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने विश्वास ने यह भी खुलासा किया कि पहले दलित उम्मीदवार को मैदान में उतारने की बात हो रही थी, लेकिन महज 11 घंटे के भीतर एक ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जिसका कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है और जो एक व्यवसायी है।

मनोज विश्वास ने कहा, ‘प्रदेश अध्यक्ष (राजेश राम) ने हमें साफ कहा था कि वोट देना है या नहीं, इसका फैसला हम खुद कर सकते हैं।’

इसी तरह, सुरेंद्र कुशवाहा ने आलोचना करते हुए कहा कि पिछड़े, दलित या महादलित समुदायों से किसी भी उम्मीदवार को नामित नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवार को थोपा गया था, जिसके कारण वे वहां उपस्थित नहीं हुए। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरे घटनाक्रम पर पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव का भी बयान आया है। उन्होंने राज्य सभा चुनाव में एनडीए की जीत की एक वजह राजद नेता तेजस्वी यादव पर आम सहमति बनाने और पार्टी नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रहना भी बताया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को राजनीतिक हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने न तो कोई बैठक बुलाई और न ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी सहित प्रमुख लोगों से सलाह-मशविरा किया। उन्होंने इसे कर्तव्य की अवहेलना करार दिया और जोर दिया कि चुनाव से पहले एक सामूहिक रणनीति बनाई जानी चाहिए थी।

राजेश राम की भी आई सफाई

इस बीच प्रदेश कांग्रस अध्यक्ष राजेश राम का भी बयान आया है। उन्होंने IANS से कहा, ‘देखिए, मैं स्पष्ट कर दूं कि मैं पार्टी का सबसे बड़ा वफादार व्यक्ति हूं। पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन प्रतिष्ठा बहुत मुश्किल से मिलती है। जिन लोगों ने मेरे ऊपर आरोप लगाए हैं, मैं केवल इतना कहूंगा कि मैं लगातार उन विधायकों से संपर्क में रहा। मैंने कई बार उन्हें फोन किया। मैं उनके घर तक गया, वहां बैठकर अनुरोध किया, लेकिन कोई नहीं मिला। इसके बाद भी मैं लगातार फोन करता रहा, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया। मैंने मैसेज भी किया कि पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल है, एक बार बात कर लीजिए। उन्होंने कॉल नहीं उठाई और आज इस तरह का आरोप लगा दिया।’

राजेश राम ने आगे कहा, ‘वोट देना आपका (विधायक) अधिकार है। पार्टी का निर्देश है कि हम इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करें और उनके पक्ष में बात करें। आप वोटर हैं। पार्टी की प्रतिष्ठा बढ़ाने में आपकी भूमिका होगी। आप सभी चीज़ में खुद निर्णय लेते हो और अब हम पर थौंप रहे हो। आपको मैं 14 तारीख की रात से कॉल कर रहा था, यदि यही बात थी तो बता देते। आप फोन क्यों नहीं उठा रहे थे…’

कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक ने नहीं दिया था वोट

बिहार से राज्य सभा की 5 सीटों के लिए सोमवार को वोटिंग हुई थी और फिर कुछ घंटे बाद नतीजे आए। इस चुनाव में पांचों सीटें एनडीए के खाते में गई। जबकि एक सीट विपक्ष के खाते में आ सकता था। हालांकि, विपक्ष के चार विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे जिससे एनडीए की राह आसान हो गई। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के तीन (सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोज विश्वास, मनोहर प्रसाद सिंह) और राजद के फैसल रहमान ने वोट नहीं डाला।

यही वजह रही कि असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और बसपा के समर्थन के बावजूद राज्य में महागठबंधन को कम से कम एक सीट जीतने के लिए जरूरी 41 वोट नहीं मिल पाए।

दूसरी ओर एनडीए की ओर से जीतने वालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले। जबकि, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को 42-42 वोट मिले। दूसरी वरीयता वाले वोटों की गिनती के बाद, पांचवीं सीट भी भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम की जीत के साथ एनडीए के खाते में चली गई।

(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें: Rajya Sabha Election Result: NDA ने बिहार में 5, ओडिशा में दो सीटों पर दर्ज की जीत, कांग्रेस का नहीं खुला खाता

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments