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प्रशांत किशोर की बांकीपुर में बड़ी जीत, भाजपा 1995 से यहां नहीं हारी थी; दतिया और मांजलपुर में क्या हुआ?

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में अपनी जीत को '30 साल पुराने किले' के ढहने जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि 30 साल पुराना किला सिर्फ 30 दिनों में ढह गया।

बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा का गढ़ माने जाने वाले इस सीट पर बड़े अंतर से जीत हासिल करते हुए राजनीति में अपने चुनावी सफर का आगाज किया है। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमार को 18 हजार से अधिक वोटों से हराया। पटना शहर में स्थित बांकीपुर सीट की यह जीत प्रशांत किशोर के लिए इसलिए खास है क्योंकि यहां पिछले तीन दशकों से भाजपा का दबदबा रहा है। भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्य सभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी। तीसरे स्थान पर राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी रहीं।

बांकीपुर में भाजपा 1995 से कोई चुनाव नहीं हारी थी। इससे पहले यहां से नितिन नबीन खुद लगातार चार बार विधायक रहे हैं। हालांकि, इस सीट के नतीजे का विधानसभा पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि बिहार में एनडीए के पास पहले से ही पूर्ण बहुमत है। बांकीपुर सीट पर गुरुवार को उपचुनाव में औसत मतदान हुआ था, जिसमें कुल 34.16 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला था। इससे पहले पिछले साल जनसुराज पार्टी को बिहार चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था और इस नई पार्टी का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका था। प्रशांत किशोर ने तब चुनाव नहीं लड़ा था।

’30 दिन में ढह गया 30 साल पुराना किला’

नतीजे साफ हो जाने के बाद जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी जीत को ’30 साल पुराने किले’ के ढहने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि यह नतीजा दिखाता है कि बिहार की राजनीतिक प्राथमिकताएं अब रोजगार, शिक्षा और विकास की ओर बढ़ रही हैं।

किशोर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ’30 साल पुराना किला सिर्फ 30 दिनों में ढह गया। यह इसलिए गिरा क्योंकि बिहार के लोग अब ऐसी सरकारें चाहते हैं जो चार-पांच किलो मुफ्त राशन और जाति की राजनीति से ऊपर उठकर उनके बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए काम करें।’

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए किशोर ने कहा, ‘सम्राट चौधरी का चरित्र और छवि पहले से ही सबके सामने है। अगर आप आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को बिहार का मुख्यमंत्री बनाते हैं, तो बिहार तरक्की नहीं कर सकता।’

उन्होंने कहा, ‘यह बांकीपुर की जनता की जीत है। जैसा कि हमने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, यह केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं था। यह बिहार की जनता की ओर से बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देने की कोशिश थी कि उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर किसी अच्छे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए।’

मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर में क्या हुआ?

गुजरात के मांजलपुर में भाजपा के सत्येंद्रभाई पटेल ने 30,630 वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। यहां सीधा मुकाबला दो उम्मीदवारों भाजपा के सत्येंद्रभाई पटेल और कांग्रेस के भीखाभाई रबारी के बीच था। भाजपा उम्मीदवार को 55481 वोट मिले जबकि भीखाभाई को 24851 मत प्राप्त हुए। नोटा के लिए 2247 उम्मीदवारों ने बटन दबाए थे। गुजरात के वडोदरा जिले की यह सीट भाजपा के सीनियर विधायक और गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री योगेश पटेल के 2 जून को लंबी बीमारी के बाद हुए निधन की वजह से खाली हो गई थी।

भाजपा की इस जीत से 182 सदस्यों वाले गुजरात विधानसभा में उसके सदस्यों की संख्या 162 हो गई है। कांग्रेस के 12 विधायक हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के पास 5 सीटें हैं। इसके अलावा दो स्वतंत्र और एक समाजवादी पार्टी के विधायक हैं।

हालांकि दूसरी ओर मध्य प्रदेश के दतिया में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों के अंतर से हराया। दतिया में भी 30 जुलाई को वोट डाले गए थे। घनश्याम सिंह के खाते में 66757 वोट आए। जबकि भाजपा उम्मीदार को 60741 वोट मिले। यहां तीसरे स्थान पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव मंडल (22527 वोट) रहे।

दरअसल दतिया में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उपचुनाव हुआ था। 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी मगर उन पर लगे एफडी में गड़बड़ी के आरोप में कोर्ट ने 2 साल से अधिक की सजा सुनाई। इसके आधार पर उन्हें आरोग्य घोषित कर दिया गया था।

भाजपा के लिए यह मुकाबला 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार को पलटने का मौका था। इस सीट पर टिकट को लेकर भाजपा के अंदरखाने खींचतान की भी खबरें आई थी। पिछले चुनाव में यहां हारने वाली भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को किनारे कर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की ओर से इस कदम पर नाराजगी की भी बात सामने आई थी।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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