जून में कफ सिरप समेत सिरप आधारित दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री पर रोक लगाने के बाद केंद्र सरकार ने अब दवा नियमन को और सख्त कर दिया है। सरकार ने 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतलों में बिकने वाली सभी ओरल दवाओं को शेड्यूल एच1 के दायरे में शामिल कर दिया है। ऐसी दवाएं अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिल सकेंगी। साथ ही मेडिकल स्टोर को हर बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा और उसे कम से कम तीन साल तक सुरक्षित रखना होगा।
8 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार का कहना है कि यह कदम कफ सिरप, हेल्थ टॉनिक और अन्य अल्कोहल युक्त दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर रोक लगाने, उनकी निगरानी मजबूत करने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
बाजार में उपलब्ध कई कफ सिरप, हेल्थ टॉनिक और अन्य तरल दवाओं में इथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल सॉल्वेंट (घोल बनाने) और प्रिजर्वेटिव (दवा को सुरक्षित रखने) के रूप में किया जाता है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी सीमित मात्रा चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित मानी जाती है।

हालांकि, सरकार के सामने ऐसी शिकायतें लगातार आ रही थीं कि कुछ लोग इन दवाओं को बिना चिकित्सकीय जरूरत के नशे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। चूंकि इनमें से कई दवाएं आसानी से ओवर-द-काउंटर मिल जाती थीं, इसलिए इनके दुरुपयोग का खतरा बढ़ रहा था। इसी को देखते हुए सरकार ने इनकी बिक्री और वितरण के नियम सख्त करने का फैसला लिया।
किसकी सिफारिश पर बदले गए नियम?
दवाओं के दुरुपयोग से जुड़ी चिंताओं की समीक्षा ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने की थी। जून 2025 में हुई डीसीसी की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके बाद विशेषज्ञों की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन का फैसला लिया।
इससे पहले भी सरकार कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू कर चुकी है। जून 2026 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए शेड्यूल K से “सिरप” श्रेणी को मिलने वाली नियामकीय छूट समाप्त कर दी थी। इसके बाद कफ सिरप समेत कई सिरप आधारित दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री पर रोक लगा दी गई थी।
नए नियम लागू होने के बाद इन दवाओं की बिक्री केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकेगी। मेडिकल स्टोरों को प्रत्येक बिक्री का पूरा रिकॉर्ड अलग रजिस्टर में दर्ज करना होगा, जिसमें मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम, दवा का विवरण और उसकी मात्रा जैसी जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, इन रिकॉर्ड और प्रिस्क्रिप्शन को कम से कम तीन वर्ष तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर ड्रग रेगुलेटर उनकी जांच कर सकें। साथ ही, इन दवाओं के लेबल पर लाल रंग का Rx चिन्ह और स्पष्ट चेतावनी भी अंकित करनी होगी कि “यह दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।”
क्या सभी अल्कोहल वाली दवाएं खतरनाक हैं, WHO क्या कहता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। दवाओं में इथाइल अल्कोहल का उपयोग कई बार तकनीकी और चिकित्सकीय कारणों से किया जाता है। यह दवा को घोलने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है।
लेकिन जर्नल ऑफ मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी (2024) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि ऐसी दवाओं का बिना डॉक्टर की सलाह के, जरूरत से अधिक या लंबे समय तक सेवन किया जाए तो बच्चों, बुजुर्गों और लिवर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों में गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी दवाओं के रैशनल यूज यानी तर्कसंगत और आवश्यकता-आधारित उपयोग पर जोर देता है। संगठन का मानना है कि दवाएं तभी लिखी और बेची जानी चाहिए, जब उनकी वास्तविक चिकित्सकीय जरूरत हो। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का इस्तेमाल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

