इस फिल्म में एक सर्वाइवर की इंसाफ की लड़ाई दिखाई गई है, जहाँ अदालत, सिस्टम और समाज—तीनों सवालों के घेरे में खड़े नजर आते हैं। तापसी पन्नू एक मजबूत वकील के किरदार में प्रभाव छोड़ती हैं, जबकि कनी कुश्रुति ने पीड़िता के दर्द और ट्रॉमा को बेहद संवेदनशील तरीके से निभाया है। कुमुद मिश्रा और जीशान अय्यूब भी कहानी को भावनात्मक गहराई देते हैं। फिल्म का पहला भाग सशक्त और कसावदार है, लेकिन दूसरे हिस्से में कई सामाजिक मुद्दों को एक साथ उठाने की वजह से कहानी थोड़ी बिखरती हुई महसूस होती है। फिर भी, यह एक जरूरी फिल्म है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

