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असम: बाढ़ राहत के नाम पर चंदा उगाहने वाले 50 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर CID की गाज; पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी राहत कोष में दान देने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें। साथ ही, बिना सत्यापन वाले ऑनलाइन अकाउंट्स में पैसे भेजने से बचें और संदिग्ध फंड जुटाने वाले अभियानों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

गुवाहाटीः असम इन दिनों बुरी तरह बाढ़ की चपेट में है। कई जिलों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच कुछ लोग इसे कमाई का जरिया बनाने की कोशिश में भी जुटे हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर कथित तौर पर ऑनलाइन चंदा जुटाने वाले ऐसे ही एक रैकेट पर अब असम पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने करीब 50 सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू की है, जिन पर बाढ़ राहत के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने का संदेह है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, साइबर सेल इन अकाउंट्स की गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। आरोप है कि इन अकाउंट्स से यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड साझा कर यह दावा किया जा रहा था कि जुटाई गई राशि असम बाढ़ राहत के लिए है।

संदिग्ध खातों के वित्तीय लेनदेन की होगी जांच

अधिकारियों ने बताया कि जांच के दायरे में आए सभी अकाउंट्स से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति या संगठन बाढ़ प्रभावित लोगों के नाम पर लोगों से धन जुटाकर उसका दुरुपयोग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी राहत कोष में दान देने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें। साथ ही, बिना सत्यापन वाले ऑनलाइन अकाउंट्स में पैसे भेजने से बचें और संदिग्ध फंड जुटाने वाले अभियानों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

असम पुलिस ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि बाढ़ से प्रभावित बच्चों की पहचान सार्वजनिक न की जाए और उनकी बिना धुंधली (अनब्लर) तस्वीरें या वीडियो साझा न किए जाएं, क्योंकि इससे वे साइबर अपराध और शोषण के खतरे में पड़ सकते हैं।

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एडवाइजरी में मीडिया संस्थानों और डिजिटल क्रिएटर्स से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने और बच्चों के अधिकारों एवं निजता का सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की गई है। CID ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य फर्जी चंदा वसूली पर रोक लगाना और राहत कार्यों के दौरान जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देना है।

गोलाघाट में बाढ़ का संकट गहराया

इस बीच, शुक्रवार को असम के गोलाघाट जिले के कई हिस्से अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। धनसिरी और दोयांग नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि दोयांग जलविद्युत परियोजना के चार गेट खोले जाने के बाद जलस्तर और बढ़ गया, जिससे बोकाखाट, गोलाघाट और खुमताई विधानसभा क्षेत्रों के कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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