नई दिल्ली: अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन के उस संयुक्त प्रस्ताव को रोक दिया है, जिसमें बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी सहयोगी मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 आतंकवाद प्रतिबंध सूची में शामिल करने की मांग की गई थी।
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कहा कि इन दोनों संगठनों का अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएल) से संबंध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र के 1267 प्रतिबंध तंत्र के तहत सूचीबद्ध करने के लिए यह एक आवश्यक शर्त है।
इस घटनाक्रम को पाकिस्तान और चीन के लिए एक कूटनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही इसे आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख के अनुरूप भी माना जा रहा है।
पाकिस्तान की कोशिशों को झटका
रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में BLA और मजीद ब्रिगेड को शामिल करवाना पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की उस रणनीति का अहम हिस्सा था, जिसके जरिए भारत को आतंकवाद का प्रायोजक देश साबित करने की कोशिश की जानी थी।
पहलगाम आतंकी हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने इन दोनों बलोच संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए थे। पिछले साल अमेरिका द्वारा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद इस्लामाबाद ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की मांग शुरू की थी।
बाद में अमेरिका ने अपने घरेलू प्रतिबंध कानूनों के तहत इन दोनों संगठनों को सूचीबद्ध कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से इन्हें संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल कराने की कोशिश में जुटे हुए थे।
भारत को मिला अमेरिका और फ्रांस का समर्थन
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने फ्रांस के सहयोग से अमेरिका को इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तकनीकी रोक (Technical hold) लगाने के लिए राजी किया। अमेरिका का कहना था कि बीएलए और मजीद ब्रिगेड का अल-कायदा या ISIL से सीधा संबंध साबित करने वाले स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। पहले इस प्रस्ताव पर छह महीने के लिए तकनीकी रोक लगाई गई, जिसे बाद में तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था।
अब अमेरिका ने अपना अंतिम रुख स्पष्ट करते हुए सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य देशों को सूचित कर दिया है कि वह इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस और ब्रिटेन ने भी अमेरिकी रुख का समर्थन किया, जबकि चीन के साथ अपने करीबी संबंधों के कारण रूस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी।
ठंडे बस्ते में अब ये प्रस्ताव!
अमेरिका के विरोध के बाद यह प्रस्ताव लगभग ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। हालांकि पाकिस्तान अब ऐसे अन्य संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध के लिए दूसरे रास्ते की तलाश कर रहा है, जिनके माध्यम से BLA और मजीद ब्रिगेड को प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल कराया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह फैसला इस बात का भी संकेत है कि वाशिंगटन आतंकवाद से जुड़े मामलों में संयुक्त राष्ट्र के भीतर चीन के रुख के साथ खड़ा दिखाई नहीं देना चाहता।
वहीं चीन की बात करें तो वह पहले भी पाकिस्तान के समर्थन में नजर आता रहा है। चीन कई बार पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल करने के भारत और अमेरिका के संयुक्त प्रयासों को रोकता या टालता भी रहा है।
इसी वजह से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन प्रमुख नाम- साजिद मीर, शाहिद महमूद और तल्हा सईद अब तक संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची से बाहर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में चीन ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिसके कारण इन्हें प्रतिबंधित सूची में नहीं डाला जा सका।

