श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर में बीते 10 दिनों के भीतर दो आंतकी हमले हो चुके हैं। शुक्रवार को हुए दूसरे आतंकी हमले ने घाटी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार शाम कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो प्रवासी मजदूरों को गोली मार दी। दोनों को गंभीर हालत में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के भूपिंदर और छत्तीसगढ़ के दीपक के रूप में हुई है।
‘नाम पूछकर आतंकियों ने मारी गोली‘
अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों ने कुलगाम शहर से करीब 16 किलोमीटर दूर केलम गांव स्थित ईंट-भट्ठे पर हमला किया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुलगाम में हुआ आतंकी हमला पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले की तर्ज पर अंजाम दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने गोली चलाने से पहले वहां मौजूद प्रवासी मजदूरों से उनके नाम पूछे और फिर दो हिंदू मजदूरों को समूह से अलग कर करीब से गोली मार दी।
सीएनएन-न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि घटनास्थल पर कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे, लेकिन निशाना सिर्फ दो हिंदू मजदूरों को बनाया गया। इसी वजह से जांच एजेंसियां इस हमले को पहलगाम आतंकी हमले से जोड़कर देख रही हैं, जिसमें धर्म पूछकर पर्यटकों की हत्या की गई थी और 26 लोगों की जान गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में दो आतंकियों के शामिल होने की आशंका है, जिनमें एक स्थानीय और दूसरा विदेशी आतंकी बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का पहला शक लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़े मोहम्मद लतीफ पर है, जो पिछले साल इस संगठन में शामिल हुआ था। टीआरएफ पर ही पहलगाम हमले को अंजाम देने का भी आरोप है।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हमलावरों की तलाश के लिए अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
10 दिनों में दूसरा आतंकी हमला, 3 लोगों की मौत
10 दिनों के भीतर यह दूसरा आतंकी हमला है। पिछले हफ्ते अनंतनाग में जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी गई थी। 22 जुलाई को वह अनंतनाग के लाल चौक पर तैनात थे। दोपहर करीब 12.30 बजे आतंकवादियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। आईआर तीसरी बटालियन के जवान कुरैशी बडगाम जिले के बीरवाह के रहने वाले थे और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे।
आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद घाटी में सुरक्षाबलों पर हुआ पहला बड़ा आतंकी हमला था। इस घटना की मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कड़ी निंदा की थी। उपराज्यपाल ने कहा था कि इस कायराना हमले के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और सुरक्षा बल उन्हें न्याय के कटघरे तक पहुंचाएंगे।
फिर से सक्रीय हो रहे आतंकी?
कुलगाम की घटना के साथ दक्षिण कश्मीर में दो सप्ताह के भीतर यह दूसरा आतंकी हमला हो गया है। इससे पहले फरवरी 2024 में श्रीनगर के शहीदगंज इलाके में पंजाब के दो गैर-स्थानीय मजदूरों की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गगनगीर में एक निर्माण परियोजना के शिविर पर हुए हमले में कई बाहरी इंजीनियरों और मजदूरों की जान गई थी।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, 2019 के बाद आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति बदली है। अब वे बड़े हमलों के बजाय ‘हाइब्रिड आतंकवाद’ के जरिए गैर-स्थानीय मजदूरों, सड़क किनारे कारोबार करने वालों, ट्रक चालकों और विकास परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आर्थिक गतिविधियों और विकास कार्यों को प्रभावित करना माना जाता है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब 10 दिनों के भीतर हुए दो नए आतंकी हमलों ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

