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दिल्ली सरकार का एलान, छात्रों के खिलाफ एक्शन नहीं, लेकिन आपराधिक रिकॉर्ड वालों को नहीं मिलेगी राहत

दिल्ली सरकार की तरफ से ये मामले उन लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए थे जिनके बारे में पुलिस को पता चला कि वे 20 जुलाई को जंतर-मंतर से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई कथित हिंसा में शामिल थे।

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने गुरुवार (30 जुलाई) को घोषणा की कि वह NEET (UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई और कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। सरकार ने हालांकि इसके साथ ही यह भी साफ कर दिया कि यह राहत आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को नहीं मिलेगी।

गौरतलब है कि ये मामले उन लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए थे जिनके बारे में पुलिस को पता चला कि वे 20 जुलाई को जंतर-मंतर से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई कथित हिंसा में शामिल थे।

दिल्ली सरकार ने हालिया प्रदर्शनों के दौरान लगे मुकदमे हटाए लेकिन

दिल्ली पुलिस ने CCTV फुटेज के जरिए 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की, जिन पर आरोप है कि उन्होंने CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया और गाड़ियों में तोड़-फोड़ की। मामले की जानकारी रखने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक इनमें से लगभग एक हजार लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड पाया गया।

बता दें कि सीजेपी ने 20 मार्च को ‘चलो संसद’ का आह्वान किया था। इस दौरान राजधानी दिल्ली में अलग-अलग राज्यों से भारी संख्या में लोग जुटे थे। इस मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें आईं थीं। इस दौरान पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पुलिस पर पैलेट गन चलाने के भी आरोप लगे हैं जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है।

हालांकि पुलिस इससे इंकार करती रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक घायल छात्र के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल का दावा किया। इस मामले में लोकसभा में भी वह सरकार को घेर रहे हैं। वहीं संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में प्रदर्शनकारियों ने भी पत्थर फेंके जिससे कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में हुए इन विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने कुल 13 मामले दर्ज किए।

इस बयान में कहा गया कि ” दिल्ली (NCT) में पुलिस अधिकारी उन लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे जो इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं। हालांकि यह सुरक्षा उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है जैसा कि ऊपर बताए गए माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है। “

सरकार ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में पहले ही गिरफ्तारियां या हिरासत की कार्रवाई हो चुकी है वहां गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की समीक्षा प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए। सरकार ने आगे कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई और दंडात्मक कार्रवाई करने का इरादा नहीं रखती है और इस मामले को बिना किसी भविष्य की कार्रवाई के बंद माना जाएगा। यह आदेश दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी से जारी किया गया था।

ऐसे में दिल्ली सरकार का यह फैसला NDA-शासित कई राज्यों द्वारा उठाए गए ऐसे ही कदमों के बाद आया है। बिहार पहला राज्य था जिसने घोषणा की थी कि वह NEET-विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR, आपराधिक शिकायतों और कारण बताओ नोटिस को वापस ले लेगा और गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा कर देगा। सरकार ने यह भी कहा कि 26 जुलाई से पहले प्रदर्शनों में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की भावना वाली कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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NEET पेपर लीक के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन

इससे पहले केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया था कि NEET पेपर लीक के आरोपों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों और वॉलंटियर्स के खिलाफ कोई कानूनी या पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी।

बता दें कि CJP के नेतृत्व में यह आंदोलन पिछले महीने तब शुरू हुआ जब बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोपों के कारण NEET (UG) परीक्षा रद्द कर दी गई। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे इस आंदोलन को तब और गति मिली जब एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के साथ इसमें हिस्सा लिया।

वहीं, 18 जुलाई को सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें धरना स्थल से उठा लिए जाने के बाद लोग और बड़ी संख्या में पहुंचे। यह संख्या तब और बढ़ी जब 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान घायल छात्रों और प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए। इसी के चलते सरकार पर दबाव बना और 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।

सीजेपी ने इस दौरान सरकार से यह भी मांग की थी कि अलग-अलग राज्यों में भी हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई एफआईआर वापस ली जाएं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
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