नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा। यह जवाब चंडीगढ़ प्रशासन की उस अपील पर मांगा गया है जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई थी। इसके तहत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के अन्य नेताओं के खिलाफ दंगा करने और गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने का मामला रद्द कर दिया गया था।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि वे इस मामले की जांच करेंगे और मान को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को भेजा नोटिस
इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा, “आदेश में दिया गया तर्क गलत है।”
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया, “हम इसकी जांच करेंगे। नोटिस जारी करें।”
गौरतलब है कि चंडीगढ़ पुलिस ने 2020 में यह मामला तब दर्ज किया था जब मान और अन्य लोगों ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध मार्च निकाला था।
AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करने की योजना बनाई थी लेकिन उन्हें वॉटर कैनन से रोक दिया गया, जिसके बाद कथित तौर पर पुलिस पर पथराव हुआ।
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज ने रद्द किया मामला
नवंबर, 2025 को हाई कोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने मामला रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने माना कि पुलिस के पास प्रदर्शनकारियों को रोकने का कोई कारण नहीं था क्योंकि कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 144 के तहत कोई निषेधाज्ञा जारी नहीं की गई थी।
हाई कोर्ट ने कहा, ” मौजूद लोगों में से किसी का भी नाम नहीं लिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर पुलिस बल पर पत्थर फेंके थे। इसके अलावा, ऐसा भी नहीं है कि याचिकाकर्ताओं ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा हो। याचिकाकर्ताओं द्वारा कथित उकसावे का तरीका भी नहीं बताया गया है; और न ही उन पर किसी तरह के खास शब्द या इशारे करने का आरोप लगाया गया है।”
इसलिए, अदालत ने कहा कि भीड़ द्वारा पत्थर फेंकने की कथित घटना के लिए याचिकाकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराने का कोई आधार नहीं था। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि दंगा करने या पुलिस अधिकारियों पर हमला करने के आरोप साबित नहीं हुए।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी।
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