NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच के बीच केंद्र सरकार ने विनीत जोशी की जगह नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है। दरअसल, इसी साल जून में नरेश पाल गंगवार का नाम उस समय विवादों में आया था, जब कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह आया कि उनके परिवार के सदस्यों को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) की एक कृषि योजना के तहत 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली थी।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गंगवार की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब ‘छिपने के लिए साफ-सुथरे चेहरे खत्म हो गए हैं।’
पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, ‘नरेंद्र मोदी के पास अब छिपने के लिए साफ चेहरों की कमी पड़ गई है। विनीत जोशी को बचाने के लिए सरकार ने ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया है, जिसकी खुद जांच होनी चाहिए। नए शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार की पत्नी, मां और बेटे को मिलाकर NHB की बागवानी सब्सिडी के रूप में 1.16 करोड़ रुपये से अधिक मिले, जबकि वह कृषि सचिव के पद पर थे। इससे पता चलता है कि इस सरकार में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला हुआ है।’
क्या है NHB सब्सिडी विवाद?
रिपोर्टों के अनुसार नरेश पाल गंगवार की पत्नी, मां और बेटे का नाम राजस्थान में खीरे की खेती से जुड़े कई प्रोजेक्ट से जुड़ा था, जिन्हें सरकारी सहायता मिली थी। कुछ दिन पहले एक अखबार में छपी रिपोर्ट में बताया गया कि गंगवार के परिवार को एनएचबी की एक योजना के तहत पांच सालों में 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी सब्सिडी प्राप्त हुई।
यह सब्सिडी उस अवधि में मिली, जब नरेश पाल गंगवार राज्य में कृषि क्षेत्र से जुड़े सीनियर सरकारी पदों पर कार्यरत थे और बाद में केंद्र सरकार में भी वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। ऐसे में सब्सिडी वाले इस मामले ने सीधे-सीधे हितों के टकराव को लेकर सवाल खड़े किए।
कौन हैं नरेश पाल गंगवार?
वर्ष 1994 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार लंबे प्रशासनिक अनुभव के साथ राजस्थान और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। 21 अक्टूबर 1970 को नैनीताल में जन्में गंगवार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है। इसके बाद कम्युनिकेशन एंड रडार में M.Tech की डिग्री हासिल की। उनके पास अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री भी है।
राजस्थान में अपने कार्यकाल के दौरान नरेश पाल गंगवार ने कई जिलों में जिला कलेक्टर के रूप में सेवाएं दीं। 2001 में उन्हें टोंक का कलेक्टर नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने सवाई माधोपुर, झालावाड़, जोधपुर, भरतपुर के भी कलेक्टर रहे।
साल 2014 में उन्हें राजस्थान सरकार में स्कूल शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया और शैक्षणिक नीतियों तथा प्रशासन के संचालन का अनुभव हासिल किया। साल 2020 में उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार में हुई। उन्हें पहले पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया। इसके बाद जनवरी 2022 में उन्हें इसी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया।
पिछले साल अगस्त में नरेश पाल गंगवार को मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग का सचिव नियुक्त किया गया था।
विनीत जोशी का पंचायत राज मंत्रालय में तबादला
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने गुरुवार को पूर्व उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला पंचायती राज मंत्रालय में कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर लगातार सरकार पर कार्रवाई का दबाव बना रहा है और आंदोलनरत है।
विनीत जोशी इससे पहले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक, CBSE के चेयरमैन और UGC के कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे पदों पर भी रह चुके हैं। उनके तबादले के बाद विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
CJP का आंदोलन जारी
इस बीच सीजेपी का आंदोलन जारी है। शिक्षा मंत्रालय कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रहा है। हालांकि, गुरुवार देर रात सोनम वांगचुक द्वारा अनशन खत्म किए जाने के बाद सरकार के लिए जरूर राहत की बात है।
बता दें कि सीजेपी के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन, जो शुरुआत में युवाओं का कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ अभियान था, अब देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का रूप ले चुका है। आंदोलनकारी नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा में अनियमितता से निपटने को लेकर कई कदमों की घोषणा की है। इनमें फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना और पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानून को लागू करने की योजना शामिल है।
यह भी पढ़ें- सोनम वांगचुक ने क्यों खत्म किया अनशन?, वीडियो जारी कर बताया, सरकार से क्या मिला आश्वासन

