राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार और पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब पिछले कुछ दिनों से ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि शरद पवार गुट भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पाले में आ सकती है। ऐसी भी अटकलें कई दिनों से हैं एनसीपी के दोनों गुटों का मिलान हो सकता है।
बहरहाल, सामने आई तस्वीरों में शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी गर्मजोशी से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी एक तस्वीर में शरद पवार का स्वागत करते भी दिखाई दे रहे हैं। यह मुलाकात की टाइमिंग इसलिए भी गौर करने वाली है क्योंकि एक दिन पहले ही कल शरद पवार कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दिपके के साथ दिखे थे। पवार और सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था और सोमवार की पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों ने भी कल प्रदर्शन किया था।

लगातार बैठकों से बढ़ीं अटकलें
हाल के दिनों में मुंबई में एनसीपी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बीच हुई बैठकों के बाद इन अटकलों ने और जोर पकड़ लिया था। माना जा रहा है कि इन बैठकों में दोनों एनसीपी गुटों के फिर से एक होने और उसके बाद एनडीए में शामिल होने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
हालांकि शरद पवार की पार्टी अभी तक लगातार इन अटकलों को खारिज करती रही है। पार्टी का कहना है कि ये बैठकें केवल प्रशासनिक मुद्दों से जुड़ी थीं और उनका किसी राजनीतिक गठजोड़ से कोई संबंध नहीं था। एनडीए में जाने की चर्चाओं पर जब शरद पवार से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा, ‘अभी यह चर्चा का विषय नहीं है।’
शरद पवार का यह रुख जून महीने में दिए गए उनके बयान से अलग माना जा रहा है। जून में उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उस समय उन्होंने कहा था, ‘शिवसेना (UBT) के सांसद टूट गए हैं, लेकिन हमारे किसी सांसद में टूट नहीं होगी।’
परिसीमन विधेयक का कनेक्शन?
मीडिया में आई सूत्रों के हवाले से आई कई रिपोर्ट में शरद पवार के एनडीए के करीब जाने को डिलीमिटेशन बिल से भी जोड़ा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार संसद में संविधान संशोधन (131वां संशोधन) विधेयक दोबारा लाने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है।
ऐसे में शरद पवार गुट के लोकसभा में आठ सांसद और राज्यसभा में एक सांसद सरकार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इसी वजह से भी एनडीए और शरद पवार गुट के बीच संभावित राजनीतिक समझौते की चर्चाओं को बल मिल रहा है।
कुछ दिनों में हो सकता है फैसला
सूत्रों के मुताबिक, इस समय एक संभावित फार्मूले पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत पहले शरद पवार और अजित पवार गुट को एक कराया जा सकता है और उसके बाद संयुक्त एनसीपी एनडीए में शामिल हो सकती है।
अगर दोनों गुटों का विलय नहीं हो पाता, तो शरद पवार गुट अलग रहकर एनडीए में शामिल हो सकता है या फिर गठबंधन के भीतर या बाहर से सरकार को समर्थन देने का विकल्प भी अपना सकता है। इस पर अगले कुछ दिनों में कोई ठोस फैसला देखने को मिल सकता है।
ऐसी भी खबरें हैं कि शरद पवार गुट के अधिकांश विधायक और सांसद सीधे एनडीए में शामिल होने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में भागीदारी मिलने से संगठन मजबूत होगा, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी के विस्तार में मदद मिलेगी।
सुप्रिया सुले ने किया खंडन
इन तमाम अटकलों के बीच सुप्रिया सुले ने मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि पार्टी ने परिसीमन या एनडीए के साथ किसी संभावित समझौते को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें ‘भ्रामक और महज अटकलें’ हैं। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने और न ही पार्टी ने इस विषय पर मीडिया से कोई आधिकारिक बातचीत की है।सुले ने कहा कि संविधान से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर पार्टी अपना रुख आंतरिक विचार-विमर्श और INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों से चर्चा के बाद ही तय करेगी।
बताते चलें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) जुलाई 2023 में दो हिस्सों में बंट गई थी, जब दिवंगत अजित पवार कई वरिष्ठ नेताओं के साथ शरद पवार का साथ छोड़कर भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों गुट अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चल रहे हैं।

