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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का दिल्ली कूच, किसान घाट जा रहे 25 हिरासत में लिए गए, क्या है मांग?

किसान संगठनों ने ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले दिल्ली में महापंचायत का ऐलान किया है। आयोजकों का दावा है कि देशभर से करीब 550 किसान यूनियन और सामाजिक संगठन इसमें शामिल होंगे। पंजाब के अलावा कई अन्य राज्यों से भी किसानों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।

फतेहगढ़ साहिबः भारत-अमेरिका के प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित महापंचायत में शामिल होने जा रहे पंजाब के सैकड़ों किसानों को मंगलवार को हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर रोक दिया। किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए हरियाणा में प्रवेश के प्रमुख रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई और बैरिकेडिंग की गई।

वहीं, दिल्ली में किसान घाट पहुंचने की कोशिश कर रहे करीब 25 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लेकर बवाना पुलिस स्टेशन भेज दिया। अधिकारियों ने किसी को भी किसान घाट परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (चरूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चरूनी को भी हिरासत में लिया है। इसके अलावा किसानों को राजधानी में पहुंचने से रोकने के लिए सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

दिल्ली में किसानों का महापंचायत, किसान नेता पंधेर ने क्या कहा?

किसान संगठनों ने ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले दिल्ली में महापंचायत का ऐलान किया है। आयोजकों का दावा है कि देशभर से करीब 550 किसान यूनियन और सामाजिक संगठन इसमें शामिल होंगे। पंजाब के अलावा कई अन्य राज्यों से भी किसानों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसानों का आधिकारिक फैसला है कि वे किसी भी बैरिकेड को नहीं तोड़ेंगे और आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में किसानों की गिरफ्तारी के बाद यह फैसला लिया गया है। पंधेर ने बताया कि हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को भी गिरफ्तार किया गया है।

पंधेर ने कहा, “देश बचाओ मोर्चा का फैसला है कि हम कोई बैरिकेड नहीं तोड़ेंगे और आगे नहीं बढ़ेंगे। यह हमारा आधिकारिक फैसला है। हमने यह फैसला दिल्ली में किसानों की गिरफ्तारियों को देखते हुए लिया है। हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को भी गिरफ्तार किया गया है। हम चाहते हैं कि सरकार बातचीत के लिए दरवाजा खोले।”

उन्होंने बताया कि उन्होंने सोमवार को अंबाला के पुलिस अधीक्षक से भी बात की थी। किसान नेताओं ने उनसे पंजाब के किसी अधिकारी से बातचीत कराने का आग्रह किया था और दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी हुई। पंधेर के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि प्रशासन को निर्देश मिले हैं कि किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाए।

इससे पहले फतेहगढ़ साहिब में पंधेर ने केंद्र और हरियाणा सरकार पर किसानों को दिल्ली जाने से रोकने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि किसान केवल चार घंटे के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए दिल्ली जाना चाहते हैं और उन्हें अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है।

‘4 घंटे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार होना चाहिए’

पंधेर ने कहा, “हम देश के 140 करोड़ लोगों के सामने यह सवाल रखना चाहते हैं कि क्या पंजाब इस देश का हिस्सा नहीं है? हमें भी अपनी राजधानी में जाकर चार घंटे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार होना चाहिए। पहले कहा जाता था कि किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आते हैं और लंबे समय तक बैठे रहते हैं। इस बार हमने बसों से जाने का फैसला किया है और केवल चार घंटे का कार्यक्रम रखा है। इसके बावजूद हमें रोका जा रहा है।”

उन्होंने दावा किया कि किसान अपने खर्च पर बसों से दिल्ली जा रहे हैं और प्रत्येक बस पर करीब 50 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। पंधेर ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान किसी तरह का टकराव नहीं चाहते और जहां भी प्रशासन उन्हें रोकेगा, वहां वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने क्या आरोप लगाए?

वहीं, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के नेता जर्मनजीत सिंह बंडाला ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असर देश के किसानों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता अमेरिकी कंपनियों और किसानों को फायदा पहुंचाने वाला है, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

बंडाला ने कहा कि अमेरिका में खेती बड़े पैमाने पर होती है और वहां किसानों को सरकार की ओर से भारी सब्सिडी और आर्थिक सहायता मिलती है। इसके मुकाबले भारत में ज्यादातर किसानों के पास दो से ढाई एकड़ तक ही जमीन है और उन्हें अपेक्षाकृत कम सरकारी सहायता मिलती है। ऐसे में अगर प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आने लगे तो छोटे भारतीय किसानों के लिए उनके साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है और उनकी आय पर असर पड़ सकता है।

किसान नेता ने दावा किया कि प्रस्तावित समझौते का असर केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे कारोबार और रोजगार के अवसरों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर अमेरिका के दबाव में समझौते को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और इसे वापस लेने की मांग की।

बंडाला ने कहा कि दिल्ली में होने वाली महापंचायत किसानों के आंदोलन की शुरुआत भर है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को वापस नहीं लेती और किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। किसान संगठनों ने कहा है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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