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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, मामले की राजनीतिकरण न करने की दी चेतावनी; कहा – यह सिर्फ अपराध का मामला

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची और वी. मोहना की पीठ, अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के लिए जमा फंड में कथित हेराफेरी की CBI से जांच कराने की मांग वाली कई जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को अयोध्या राम मंदिर फंड में हेराफेरी के मामले का राजनीतिकरण करने के खिलाफ चेतावनी दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची और वी. मोहना की पीठ, अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के लिए जमा फंड में कथित हेराफेरी की CBI से जांच कराने की मांग वाली कई जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।

आज की सुनवाई के दौरान CJI कांत ने कहा कि ” बस एक बात का ध्यान रखें… इस मामले को राजनीतिक रंग न दें। अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं। यह अपराध का एक सीधा-सादा मामला है। हमें बस यह सुनिश्चित करना है कि इसकी ठीक से जांच हो।”

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत के पहले के निर्देशों के मुताबिक, आज अब तक हुई जांच की स्थिति पर एक रिपोर्ट भी सौंपी गई। CJI कांत ने पूछा, “अभी जांच कौन कर रहा है?”

इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया, “सच्चाई का पता लगाने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई थी। अब पुलिस इसकी जांच कर रही है। SIT ने पाया है कि यह एक कॉग्निजेबल ऑफेंस (ऐसा अपराध जिसमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है) है।”

कोर्ट ने इस बात पर राज्य से जवाब मांगा कि क्या जांच के लिए SIT को भी काम सौंपा जा सकता है, और इसके बाद मामले की सुनवाई टाल दी।

CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ” हम 3-4 दिन बाद इस मामले पर सुनवाई करेंगे और जांच के पहलू पर गौर करेंगे। SIT में सीनियर सदस्य होते हैं। कृपया पता करें कि क्या जांच के लिए SIT बनाई जा सकती है। “

इस पर SG मेहता ने जवाब दिया, “हां। हम इसे बनाएंगे और रिकॉर्ड पर रखेंगे।”

यह भी पढ़ें – धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या कर चुके NEET अभ्यर्थियों के लिए 1 करोड़; जेपी नड्डा से मिलकर CJP ने रखी 3 मांगे

चंदे की रसीदों को सुरक्षित रखा जाए और अपलोड किया जाए

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि याचिकाकर्ता जवाबदेही चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि ” हमारी PIL में कहा गया है कि जब मंदिर बनाया गया था, तब सभी से चंदा मांगा गया था। अब हम चाहते हैं कि उन रसीदों को सुरक्षित रखा जाए और अपलोड किया जाए। “

अदालत ने भरोसा दिलाया कि “हां, हम इस पर गौर करेंगे।” दूसरे वकीलों ने कोर्ट से डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस मामले में दर्ज FIR को अपलोड करने का निर्देश देने का आग्रह किया। SG मेहता ने भरोसा दिलाया कि सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं।

अदालत ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को करेगी।


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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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