नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े ‘आपत्तिजनक’ और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कथित वीडियो के विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो को AI से तैयार किया गया बताने वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने के लिए एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ को 10 लाख रुपये दिए थे। इस फॉरेंसिक विशेषज्ञ की शिकायत पर ही दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भगवंत मान इस वीडियो को लेकर अकाल तख्त के सामने दावा कर चुके हैं कि ये फर्जी है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में पंजाब सरकार के दो अधिकारियों का जिक्र किया गया है। इनमें एक अधिकारी डीआईजी रैंक का बताया गया है, जबकि दूसरा एसपी रैंक का है। हालांकि फिलहाल गिरफ्तार किए गए दो व्यक्तियों की पहचान अंकित और अरुण के रूप में हुई है। दोनों को अदालत में पेश किया जाएगा।
यह मामला उस वीडियो क्लिप से जुड़ा है जिसे लेकर पंजाब में काफी विवाद चल रहा है। वीडियो में मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति सिख गुरूओं की फोटो पर शराब के छींटे मार रहा है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने वीडियो को ‘प्रामाणिक’ बताया था और मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ (गुरु विरोधी) सहित ‘पंथ विरोधी’ करार दिया था। दूसरी ओर, भगवंत मान लगातार दावा करते रहे हैं कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं, बल्कि उनकी छवि खराब करने के लिए किसी और का इस्तेमाल किया गया है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट की शिकायत से खुला मामला!
सूत्रों के अनुसार गुरुग्राम पुलिस ने फॉरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। जसप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि उन पर दबाव बनाकर एक मनगढ़ंत फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई गई थी।
बताया गया है कि पुलिस को दिए गए अपने वीडियो बयान में जसप्रीत सिंह ने स्वीकार किया कि उन्होंने दबाव में आकर रिपोर्ट तैयार की थी। सूत्रों के अनुसार उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इस रिपोर्ट का इस्तेमाल अकाल तख्त के निष्कर्षों का जवाब देने के लिए किया जाएगा। उन्होंने खुद सिख समुदाय का होने कारण बाद में पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत पुलिस को दी।
गुड़गांव पुलिस को दिए अपने बयान में जसप्रीत ने दावा किया कि उसने दो साइबर एक्सपर्ट्स – दिल्ली में अंकित और पंचकूला में अरुण की मदद ली थी। साथ ही, पंजाब पुलिस में एसपी की लगातार व्हाट्सऐप निगरानी में ड्राफ्ट रिपोर्ट को बार-बार तब तक एडिट किया गया, जब तक कि ये दोनों पुलिस अधिकारियों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं हो गई।
होटल में हुई बैठकों का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 15 जून की रात 9.40 बजे डीआईजी रैंक के अधिकारी ने गुरुग्राम के एक होटल में चेक-इन किया। करीब एक घंटे बाद एसपी रैंक के अधिकारी भी उसी होटल में पहुंचे। इसके बाद जसप्रीत एक बैग लेकर होटल पहुँचे। वह सीधे एसपी रैंक के अधिकारी के कमरे में गए और वहाँ करीब 40 मिनट बिताए। इसके बाद, दोनों डीआईजी रैंक के अधिकारी के कमरे में गए और 15 मिनट तक बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक, जसप्रीत होटल से निकलकर गुरुग्राम के सेक्टर 46 स्थित एक गेस्ट हाउस में रात बिताने चले गए।
अगले दिन नाश्ते के दौरान कथित तौर पर जसप्रीत सिंह को निर्देश दिया गया कि वे दो अलग-अलग साइबर विशेषज्ञों या लैब से ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाएं, जिसमें वीडियो को एआई-जनरेटेड बताया जाए। सूत्रों के मुताबिक जसप्रीत को आश्वासन दिया गया कि इसके लिए उन्हें अच्छा भुगतान किया जाएगा।
10 लाख रुपये नकद देने का आरोप
सूत्रों के अनुसार गुड़गांव पुलिस ने जांच में पाया कि होटल से निकलते समय जसप्रीत सिंह को डीआईजी रैंक के अधिकारी के सुरक्षा कर्मियों द्वारा 10 लाख रुपये नकद दिए गए। पुलिस के अनुसार जसप्रीत द्वारा इस रकम में से 7.5 लाख रुपये एक किस्त के भुगतान में खर्च किए गए, जबकि 2.5 लाख रुपये उसने ने अपने बैंक खाते में जमा किए। जांच में यह भी सामने आया कि जसप्रीत ने अंकित को ऑनलाइन माध्यम से 50 हजार रुपये का भुगतान किया था, जबकि अरुण को अभी भुगतान नहीं किया गया था। फिलहाल गुरुग्राम पुलिस मामले की जांच कर रही है। दूसरी ओर, मामले में नाम आने वाले अधिकारियों या पंजाब सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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