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होर्मुज बंद करने की धमकी के बीच स्विट्जरलैंड रवाना हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ईरान के साथ अगले चरण की होगी वार्ता

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबाफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुरक्षा मामलों के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं।

पश्चिम एशिया में पिछले चार महीनों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए रविवार से स्विट्जरलैंड में एक महत्वपूर्ण शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। इस कूटनीतिक महावार्ता में हिस्सा लेने के लिए ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वाशिंगटन से बर्न के लिए रवाना हो गए हैं। हालांकि, इस वार्ता से ठीक पहले दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के ईरानी दावे और लेबनान में लागू हुए युद्धविराम के उल्लंघन से तनाव फिर बढ़ गया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जॉइंट बेस एंड्रयूज से गल्फस्ट्रीम सी-37 विमान के जरिए स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हुए। सामान्य विमान के मुकाबले इस छोटे एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि यह आपातकालीन दौरों के लिए अधिक तेजी से उपलब्ध हो जाता है। विमान में सवार होने से पहले उपराष्ट्रपति वेंस ने मीडिया को बताया कि उनकी समझ के अनुसार ईरानी वार्ताकार पहले ही बैठक स्थल पर पहुंच चुके हैं और दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ पहले से ही जमीनी तैयारी में जुटे हैं। वेंस ने स्पष्ट किया कि कूटनीतिक प्रक्रिया को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए यह बातचीत कई दिनों तक चल सकती है।

जेडी वेंस ने बातचीत के दो अहम मुद्दे क्या बताए?

यह वार्ता उस समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत हो रही है, जिस पर इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते का उद्देश्य लगभग चार महीने से जारी टकराव को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत विभिन्न विवादित मुद्दों पर आगे बढ़ना है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुरक्षा मामलों के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति के अनुसार, स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न के पास बर्गेनस्टॉक में होने वाली इस बैठक के मुख्य एजेंडे में दो सबसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। पहला मुद्दा तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर रुकी हुई चर्चा को आगे बढ़ाना है और दूसरा सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य लेबनान में हाल ही में लागू हुए बेहद नाजुक युद्धविराम को स्थायी रूप से टिकाए रखना है। वेंस ने कहा कि इस वार्ता का पहला मकसद दोनों देशों के बीच असली स्ट्रक्चर और संवाद को सही जगह पर लाना है ताकि भविष्य में होने वाली वार्ताओं के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया जा सके।

होर्मुज को लेकर फिर तनाव

वार्ता से पहले सबसे बड़ा तनाव होर्मुज को लेकर पैदा हुआ है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शनिवार को दावा किया कि उसने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद कर दिया है और जहाजों को वहां से गुजरने के खिलाफ चेतावनी दी है।

आईआरजीसी ने इसके लिए लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई और संघर्षविराम समझौते के कथित उल्लंघन को जिम्मेदार ठहराया। ईरान का आरोप है कि अमेरिका भी युद्धविराम की शर्तों को लागू कराने में विफल रहा है।

हालांकि अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार शनिवार को 55 से अधिक व्यापारिक जहाज सुरक्षित रूप से इस जलमार्ग से गुजरे, जिनमें करीब 1.7 करोड़ बैरल तेल और अन्य सामान ले जाया जा रहा था। अमेरिका ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात बाधित नहीं होने दिया जाएगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी आश्वस्त किया कि उन्हें होर्मुज के वास्तव में बंद होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और अमेरिकी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग में व्यापारिक यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

ये भी पढ़ेंः लेबनान में इजराइली हमलों से भड़का ईरान, होर्मुज बंद करने का ऐलान; अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप

तार-तार होता लेबनान सीजफायर और नेतन्याहू सरकार से इजराइली जनता की नाराजगी

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता शुरू होने की प्रमुख शर्तों में लेबनान में संघर्षविराम भी शामिल था। लेकिन हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। लेबनान की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के कुछ घंटों बाद ही शनिवार को इजराइली हमलों में 20 लोगों की मौत हो गई। दूसरी ओर इजराइल का कहना है कि उसने हिज्बुल्लाह द्वारा दागे गए 50 से अधिक रॉकेटों के हमलों के जवाब में कार्रवाई की।

हिज्बुल्लाह ने भी कहा है कि वह लेबनान में इजराइल को पूर्ण स्वतंत्रता नहीं देगा। इजराइल ने संकेत दिया है कि वह अपने नियंत्रण वाले इलाकों से तत्काल पीछे नहीं हटेगा। गौरतलब है कि लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से जारी इस भीषण संघर्ष में अब तक 4,057 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि इजराइल के 32 सैनिकों और 4 नागरिकों की जान गई है।

जेडी वेंस ने स्वीकार किया कि संघर्षविराम बनाए रखना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अक्सर एक पक्ष की गोलीबारी के बाद दूसरा पक्ष जवाबी कार्रवाई करता है और स्थिति तेजी से बिगड़ जाती है। वेंस ने कहा कि हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि इजराइल और लेबनान दोनों सुरक्षित रहें। पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हाल की हिंसा के बावजूद उन्हें लगता है कि स्थिति धीरे-धीरे बेहतर दिशा में बढ़ रही है और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत पूरी कूटनीतिक टीम इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

इस बीच इजराइल में हुए एक हालिया सर्वेक्षण ने भी सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। सर्वे में शामिल बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि मौजूदा संघर्ष से ईरान को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला है। अधिकांश उत्तरदाताओं ने यह भी कहा कि युद्ध के घोषित लक्ष्य अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल बर्गेनस्टॉक पहुंच चुका है और अमेरिका के साथ वार्ता की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंत्रालय ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच संवाद को सफल बनाने के लिए सहयोग जारी रखेगा।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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