लखनऊ: उत्तर प्रदेश ने पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार करते हुए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही राज्य ने 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की अपनी महत्वाकांक्षा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCIS) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का निर्यात बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष के 1,86,060 करोड़ रुपये की तुलना में 8.16 प्रतिशत अधिक है।
राज्य का यह निर्यात वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत निर्यात वृद्धि दर 5.45 प्रतिशत से कहीं अधिक है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के बढ़ते विनिर्माण आधार, वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियों का परिणाम के तौर पर देखी जा सकती है। उत्तर प्रदेश साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक के बाद देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बना हुआ है।
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के उत्तर प्रदेश चैप्टर के चेयरमैन मुकेश सिंह ने कहा, ‘निर्यात में वृद्धि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और यह राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। मजबूत निर्यात से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, निवेश आकर्षित होता है, एमएसएमई मजबूत होते हैं और उत्तर प्रदेश में मौजूद उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ती है।’
वहीं, कई अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने में निरंतर निर्यात वृद्धि की अहम भूमिका होगी। अधिक निर्यात का मतलब औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि, राज्य में निर्मित वस्तुओं की मांग बढ़ना, रोजगार के नए अवसर पैदा होना, विदेशी मुद्रा आय में इजाफा और निजी निवेश को मजबूती मिलना है। इससे उन एमएसएमई, कारीगरों और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है, जो निर्यात आधारित उद्योगों के जरिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े हुए हैं।
विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे पर जोर
खास बात ये भी है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब योगी आदित्यनाथ सरकार आर्थिक विस्तार को गति देने के लिए विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दे रही है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP), डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, डेटा सेंटर और जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं से राज्य के निर्यात तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि 2 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए निर्यात में इससे कहीं अधिक तेज गति से वृद्धि की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा, ‘सरकार आने वाले वर्षों में निर्यात को 3 लाख करोड़ रुपये से आगे ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए नए निर्यात केंद्र विकसित किए जाएंगे, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जाएगा, एयर कार्गो सुविधाओं का विस्तार होगा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निर्यातकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा।’
वहीं, फिक्की उत्तर प्रदेश चैप्टर के चेयरमैन मनोज गुप्ता और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने कहा कि आंकड़ों के बेहतर संकलन और निर्यात रिपोर्टिंग प्रणाली में बदलाव का कई राज्यों में दर्ज हुई असाधारण वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
बड़ी उपलब्धि, पर कुछ चुनौतियां अब भी हैं…
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के सामने अब भी कई संरचनात्मक चुनौतियां मौजूद हैं। राज्य की समुद्री बंदरगाहों तक सीधी पहुंच नहीं है, जिससे तटीय राज्यों की तुलना में लॉजिस्टिक्स लागत अधिक पड़ती है। वहीं, एमएसएमई निर्यातकों की वैश्विक बाजारों में पहुंच अभी सीमित है और उच्च मूल्य वाले प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी अग्रणी विनिर्माण राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हैं।
हालांकि, वित्त वर्ष के दौरान कई राज्यों ने निर्यात में प्रतिशत के लिहाज से अधिक तेज वृद्धि दर्ज की, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ पड़ोसी राज्यों में दिखाई देने वाली असाधारण बढ़ोतरी का बड़ा कारण निर्यात रिपोर्टिंग प्रणाली में बदलाव, कस्टम आधारित वर्गीकरण और शिपमेंट के दस्तावेजीकरण में सुधार रहा है।
इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश की निर्यात वृद्धि विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक और वास्तविक विस्तार को दर्शाती है। यही वजह है कि राज्य ने देश के शीर्ष निर्यातक राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति भी बरकरार रखी है।
निर्यात आधारित विकास जबकि अब सूबे की आर्थिक रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बनता जा रहा है, ऐसे में उत्तर प्रदेश निर्यात उत्पादों में विविधता लाने, विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और वैश्विक बाजारों से कनेक्टिविटी मजबूत करने के प्रयासों को और तेज कर सकता है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश को अपने 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को हकीकत में बदलना है, तो आने वाले सालों में दो अंकों वाली निर्यात वृद्धि दर बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
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