Homeभारतअल नीनो सक्रिय हुआ, मानसून के बीच और तेज होगा असर; मौसम...

अल नीनो सक्रिय हुआ, मानसून के बीच और तेज होगा असर; मौसम विभाग ने जारी कर दी चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से में समुद्र की सतह के नीचे भी सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया है। यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में गर्म पानी सतह पर आता रहेगा और अल नीनो की स्थिति को और मजबूती देगा।

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Nino) की स्थिति विकसित हो चुकी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान यह और अधिक मजबूत हो सकती है।

आईएमडी ने इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) बुलेटिन में कहा कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान अल नीनो की स्थिति बनने के लिए आवश्यक सीमा को पार कर चुका है। विभाग के अनुसार, केवल समुद्र ही नहीं बल्कि वातावरण ने भी इस गर्माहट पर प्रतिक्रिया दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि समुद्र और वातावरण की संयुक्त प्रणाली अब पूरी तरह अल नीनो की अवस्था में पहुंच चुकी है।

अल नीनो पर IMD की चेतावनी

IMD ने अपने बुलेटिन में कहा, ‘वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मौजूद है और इसके दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान और मजबूत होने की संभावना है।’

मानसून मिशन कपल्ड फॉरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के पूर्वानुमान बताते हैं कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ अल नीनो की तीव्रता भी बढ़ सकती है। बुलेटिन के मुताबिक, जून 2026 में मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान अल नीनो के लिए जरूरी सीमा से ऊपर पहुंच गया। साथ ही, अल नीनो की निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला प्रमुख संकेतक नियो 3.4 इंडेक्स भी +0.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया है, जिससे अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत की पुष्टि होती है। इस इंडेक्स में पिछले तीन महीने की परिस्थितियों पर गौर किया जाता है।

मौसम विभाग ने यह भी कहा कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से में समुद्र की सतह के नीचे भी सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया है। यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में गर्म पानी सतह पर आता रहेगा और अल नीनो की स्थिति को और मजबूती देगा।

जून से अगस्त तक सबसे ज्यादा प्रभाव

पूर्वानुमानों के अनुसार, जून से अगस्त के दौरान मध्य प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा। जुलाई से यह गर्माहट मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के बड़े हिस्सों में फैलने और मजबूत होने की संभावना है। ताजा मॉडल अनुमानों से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अधिकांश हिस्से में मध्यम से मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी रह सकती है।

बता दें कि अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है। यह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के सामान्य से ज्यादा तापमान होने की स्थिति से जुड़ा होता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। भारत में आमतौर पर इसका संबंध कमजोर मानसूनी बारिश, अधिक तापमान, लंबे शुष्क दौर और सूखे के जोखिम से जोड़कर देखा जाता रहा रहा है।

हालांकि, IMD ने ये भी स्पष्ट किया है कि भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाला अल नीनो अकेला कारक नहीं है। विभाग के अनुसार, फिलहाल हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) स्थिति तटस्थ (न्यूट्रल) (Neutral) बनी हुई है और मानसून के दौरान इसके इसी स्थिति में बने रहने की संभावना है। न्यूट्रल IOD का मतलब है कि इस साल इसके अल नीनो के प्रभाव को न तो उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने और न ही कम करने की संभावना है।

भारत के लिए एक उम्मीद भी…

इस बीच जापान के मौसम विभाग ने 11 जून को अल नीनो की आधिकारिक घोषणा करते हुए भारत के लिए एक संभावित सकारात्मक संकेत भी दिया था। एजेंसी का कहना है कि जुलाई के आसपास सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल (Positive IOD) विकसित हो सकता है, जो भारत के मानसून पर पड़ने वाले संभावित मजबूत या सुपर अल नीनो के कुछ प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद करेगा।

वहीं, भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि वह प्रशांत महासागर की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और मानसून के आगे बढ़ने के साथ बदलती स्थिति को लेकर जानकारी साझा करता रहेगा।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) क्या है?

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) हिंद महासागर में होने वाली एक जलवायु घटना है, जो भारत समेत कई देशों के मौसम और मानसून को प्रभावित करती है। इसे आसान भाषा में समझें तो IOD यह बताता है कि हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से (अफ्रीका के पास) और पूर्वी हिस्से (इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया के पास) के समुद्र का तापमान एक-दूसरे की तुलना में कितना गर्म या ठंडा है। यहां ये भी गौर करना जरूरी है कि IOD हिंद महासागर में जबकि अल नीनो प्रशांत महासागर में होता है। कई बार मजबूत पॉजिटिव IOD, अल नीनो के बुरे असर को कम कर देता है।

IOD तीन प्रकार हो सकते हैं। इसमें एक पॉजिटिव IOD है। इस परिस्थिति में पश्चिमी हिंद महासागर ज्यादा गर्म होता है। पूर्वी हिंद महासागर अपेक्षाकृत ठंडा होता है। इससे भारत की ओर नमी खिंचती है। आमतौर पर भारत में मानसून को मजबूती मिलती है और बारिश बढ़ सकती है।

दूसरा प्रकार नेगेटिव IOD है। इसमें पूर्वी हिंद महासागर ज्यादा गर्म होता है। पश्चिमी हिस्सा अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। नमी भारत की बजाय इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर ज्यादा जाती है। इससे भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। वहीं, तीसरा प्रकार न्यूट्रल IOD है। इस परिस्थिति में दोनों हिस्सों के तापमान में कोई बड़ा अंतर नहीं होता। ऐसे में इसका मानसून पर खास प्रभाव नहीं पड़ता।

यह भी पढ़ें- सदी के सबसे ताकतवर ‘सुपर अल नीनो’ की आहट! भारत पर खतरा; क्या है 1877 की वो कहानी जब मारे गए थे करोड़ो लोग

author avatar
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular