कोलकाता: पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी में इन दिनों भारी उठापटक देखने को मिल रही है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार (08 जून) को दावा किया कि पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इन सांसदों में अपनी स्थिति से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अवगत करा दिया है। इससे पार्टी की संसदीय इकाई में विभाजन उत्पन्न हो गया है।
इससे पहले दिन में पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने इस्तीफा दे दिया था। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी नेतृत्व को मिले झटके के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। जब उसके 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी हाई कमांड के अनुभवी नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के फैसले की अवहेलना की और निष्कासित विधायक रितब्रता बनर्जी को उस पद पर निर्वाचित कर दिया।
TMC में देखी जा रही भारी उथल-पुथल
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से टीएमसी में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल सोमवार को उसके संसदीय खेमे में भी झलकती नजर आई। कुछ बागी सांसदों ने एनडीए को अपना समर्थन दिया जबकि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ अखिल भारतीय रणनीति बनाने के लिए दिल्ली में आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक में भाग ले रही थीं।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने काकोली घोष के हवाले से लिखा कि सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले की जानकारी स्पीकर को दे दी है।
उन्होंने कहा “मुझ समेत टीएमसी के करीब बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है।” घोष ने आगे कहा कि “हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर एनडीए को अपना समर्थन देने की इच्छा व्यक्त की है।”
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि बागी सांसद स्पीकर के समक्ष यह तर्क देने का इरादा रखते हैं कि घोष दस्तीदार लोकसभा में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनी हुई हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के अनुसार नहीं किए गए थे।
टीएमसी के एक अन्य बागी सांसद ने पीटीआई को बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक पद से हटाकर उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त करने का निर्णय लिया था लेकिन इसकी सूचना लोकसभा सचिवालय को नहीं दी गई थी।
NDA के अनुरूप होना चाहिए भविष्य: काकोली घोष
लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक होने का दावा करते हुए घोष ने कहा कि यह निर्णय साथी सांसदों से परामर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि “हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना है कि हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग एनडीए के अनुरूप होना चाहिए।”
बागी खेमे के सांसदों ने हालांकि टीएमसी से तुरंत इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय वे एनडीए का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करने का इरादा रखते हैं। यह रणनीति दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
टीएमसी के पास फिलहाल लोकसभा में 28 सांसद हैं। इनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली हुई है। 20 सांसदों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत को आसानी से पार कर जाएगा।
टीएमसी का यह घटनाक्रम बागी सांसदों द्वारा नई दिल्ली में एक दिन पहले आयोजित की गई बंद कमरे की बैठक के बाद सामने आया है। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों पर टीएमसी नेतृत्व के अधिकार को लेकर सवाल और भी तीव्र होने की संभावना है। वहीं टीएमसी में फूट अब खुले तौर पर देखी जा रही है जो कि हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के लिए चिंता का विषय है।
बताते चलें कि 2026 विधानसभा चुनाव में टीएमसी के 15 साल लंबे कार्यकाल का अंत हुआ। 2011 से टीएमसी लगातार राज्य की सत्ता पर काबिज थी। 2026 विधानसभा चुनाव में हालांकि पार्टी को महज 80 सीटों पर ही जीत मिली।

