पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने लगे हैं। संघर्षविराम के करीब दो महीने बाद इजराइल और ईरान फिर से जंग में कूद पड़े हैं। ईरान की ओर से इजराइल पर लगातार बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए जाने के बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दक्षिण-पश्चिमी ईरान के महशहर स्थित एक प्रमुख पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया है। इस हमले में करुण पेट्रोकेमिकल संयंत्र को नुकसान पहुंचा है जिसकी पुष्टि ईरानी अधिकारियों ने भी की है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, सोमवार तड़के ईरानी राजधानी के पश्चिमी हिस्सों में कम से कम दो धमाकों की आवाज सुनी गई।
इजराइली सेना (आईडीएफ) ने कहा कि उसकी वायुसेना ने महशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के भीतर कई ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इसे ईरानी बुनियादी ढांचे पर इजराइल की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी इजराइल पर मिसाइल हमले जारी रखे। आईडीएफ के अनुसार सोमवार सुबह ईरान की ओर से मिसाइलों की एक नई खेप दागी गई। ईरानी मिसाइल हमलों के बाद दक्षिणी इजराइल के शहर बेर्शेबा और आसपास के क्षेत्रों में सायरन बजने लगे। इजराइल सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हमलों के बावजूद तत्काल किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।
अमेरिका के इजराइल स्थित राजदूत माइक हकाबी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ईरान ने रविवार रात और सोमवार तड़के इजराइल पर मिसाइलें दागीं, लेकिन अधिकांश को रोक दिया गया। उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजराइल को निशाना बनाने की मंशा रखने का आरोप लगाया।
भारतीय दूतावास ने नागरिकों से ईरान छोड़ने को कहा
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने भारतीयों से फिलहाल ईरान की यात्रा न करने और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों से उपलब्ध परिवहन साधनों के जरिए जल्द से जल्द देश छोड़ने की अपील की है।
8 जून को जारी एडवाइजरी में भारतीय दूतावास ने कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। ऐसे में भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने और दूतावास की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
दूतावास ने कहा कि जो भारतीय नागरिक वर्तमान में ईरान में हैं, वे उपलब्ध उड़ानों और अन्य परिवहन साधनों का उपयोग करते हुए सुरक्षित स्थानों के लिए प्रस्थान करने पर विचार करें। साथ ही उन्हें स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का भी पालन करने को कहा गया है।
आईआरजीसी ने शुरू किया ‘ऑपरेशन नसर’
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने “ऑपरेशन नसर” शुरू किया है। आईआरजीसी के बयान के अनुसार यह अभियान पिछले वर्ष के 12-दिवसीय युद्ध में मारे गए लोगों की स्मृति को समर्पित है।
आईआरजीसी ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने इजराइल के रणनीतिक तेल नोफ और नेवतिम एयरबेस को निशाना बनाया। संगठन के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान के भीतर कई रडार ठिकानों पर हुए इजराइली मिसाइल हमलों के जवाब में की गई।
बयान में कहा गया कि आईआरजीसी की सभी सैन्य और परिचालन इकाइयां पूर्ण सतर्कता पर हैं तथा किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए व्यापक कार्रवाई योजनाएं तैयार कर ली गई हैं।
लेबनान को लेकर ईरान की नई चेतावनी
तनाव के बीच ईरान ने लेबनान को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख कमांडर अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी कि यदि इजराइल दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी उपनगर दाहियेह में अपने हमले जारी रखता है या ईरान की कार्रवाई का जवाब देता है तो उसे और अधिक “विनाशकारी तथा पछतावा कराने वाले” हमलों का सामना करना पड़ेगा।
अब्दुल्लाही ने आरोप लगाया कि इजराइल अमेरिकी समर्थन के साथ लेबनान में लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने इजराइल पर प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल और युद्ध अपराध करने के आरोप भी लगाए।
आईआरजीसी ने दावा किया कि रविवार को उत्तरी इजराइल स्थित रमत डेविड एयरबेस पर किया गया मिसाइल हमला लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में था। संगठन के अनुसार यह एयरबेस लेबनान पर हमलों का प्रमुख केंद्र रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया नियम होगा लागू?
इस बीच ईरान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा संकेत दिया है। रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने कहा कि जलडमरूमध्य खुला रहेगा, लेकिन इसके संचालन के लिए ईरान और ओमान नए नियम लागू करेंगे।
उन्होंने कहा कि दोनों देश जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए शुल्क वसूल सकते हैं। ऐसे समय में यह बयान सामने आया है जब ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण तेल और एलएनजी की आवाजाही पहले से प्रभावित है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव का अमेरिका विरोध कर सकता है।
ईरान-अमेरिका शांतिवार्ता पर गहराया संकट?
गौरतलब है कि 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच युद्धविराम लागू हुआ था, जिससे 40 दिनों तक चले संघर्ष पर अस्थायी विराम लगा था। हालांकि इसके बाद भी लेबनान और अन्य क्षेत्रों को लेकर तनाव बना रहा।
हाल के सप्ताहों में वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत और प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है। लेकिन ताजा मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया को व्यापक संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
इस बीच ईरान-अमेरिका के बीच हो रही शांतिवार्ता को लेकर भी संकट बनता दिख रहा है। ईरान और इजराइल के एक-दूसरे पर ताजा हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के माथे पर भी तनाव की लकीरें खींच गई हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से मिसाइलें दागने से पहले अमेरिका और ईरान किसी समझौते के बहुत करीब पहुंच चुके थे। ट्रंप ने दोनों पक्षों से तत्काल हमले रोकने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
ईरान ने इजराइल पर दागीं कई बैलिस्टिक मिसाइलें, ट्रंप ने बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की

