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बेतरतीब कंक्रीट इमारतें, घटती हरियाली…दिल्ली क्यों धधक रही? पानी और बिजली संकट से भी बढ़ी परेशानी

अभी जून का महीना बाकी है। इसे पारंपरिक रूप से दिल्ली की सबसे भीषण गर्मी का महीना माना जाता है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में पानी और बिजली को लेकर दबाव और भी बढ़ सकता है।

नई दिल्ली: देश की राजधानी इन दिनों भीषण गर्मी से जूझ रही है। तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। भीषण गर्मी के बीच दिल्ली में कुछ इलाकों में बिजली में कटौती और पानी के संकट ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिन की जलाने वाली धूप के बाद शाम को भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। आलम ये है कि दिल्ली में रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात 14 सालों में सबसे गर्म रात रही। न्यूनतम तामपान 32.4 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 5.7 डिग्री ज्यादा है। इससे पहले 21 मई की रात भी तापमान 31.9 डिग्री रहा था। इससे पहले 2012 में 27 मई की रात का न्यूनतम तापमान 34.2 डिग्री रहा था।

दिल्ली में बढ़ती गर्मी की वजह क्या?

पिछले कुछ सालों में दिल्ली में गर्मी तेजी से बढ़ी है। जानकार इसके पीछे दिल्ली में पिछले दो से तीन दशक में घनी रिहायशी बसावट में तेजी, बगैर किसी योजना के बसी कॉलोनियों के साथ-साथ घटती हरियाली को वजह मानते हैं। हाल में विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (CSE) की एक रिपोर्ट में भी इसकी तस्दीक हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार स्थिति ये है कि एक ओर जहां यमुना नदी के किनारों के आसपास की जमीन का तापमान गर्म दिनों में भी 30-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, तो वहीं इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के इलाकों में यह 60.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। एक ही शहर के भीतर तापमान में 27 डिग्री का ये अंतर पूरी कहानी बता रहा है। ये कुल मिलाकर ऐसे इलाके हैं जहां हरियाली न के बराबर है।

स्टडी में पाया गया कि दिल्ली के लगभग तीन-चौथाई भूभाग पर 2015 से 2024 के बीच बार-बार भीषण गर्मी का प्रकोप रहा है, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र, घनी आबादी वाले आवासीय इलाके और अनियोजित बस्तियां सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं।

नतीजा ये होता है कि सीमेंट-कंक्रीट की बनी ये सघन इमारते, सड़कें और गलियां दिन भर सूरज की गर्मी सोखती हैं और भट्टी की तरह तपने लगती हैं। ये इतना ज्यादा गर्मी अवशोषित करती हैं कि सूरज डूबने के कई घंटे बाद तक असर बरकरार रहता है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 75.78 प्रतिशत क्षेत्र पिछले छह साल से लगातार ‘हीट स्ट्रेस’ की मार झेल रहे हैं।

लुटियंस दिल्ली के इलाके, सिविल लाइंस, दिल्ली कैंट आदि जगहों पर गर्मी की मार कम है। इसकी वजह ये है कि यहां निर्माण योजनाबद्ध तरीके से है और घने पेड़-पौधों की संख्या कहीं ज्यादा है। इसी तरह मयूर विहार, मॉडल टाउन, रोहिणी, वसंत विहार जैसे इलाकों में भी हीट स्ट्रेस अपेक्षाकृत कम है।

पानी और बिजले के संकट ने भी बढ़ाई मुश्किलें

दिल्ली में बिजली की मांग मौजूदा गर्मी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 20 मई को शहर में बिजली की मांग पहली बार 8,039 मेगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो अगले दिन बढ़कर 8,647 मेगावाट हो गई थी। यह 2024 के रिकॉर्ड के बराबर है। अधिकारियों को आशंका है कि जून में तापमान बढ़ने के साथ यह आंकड़ा 9,000 मेगावाट को भी पार कर सकता है।

बिजली आपूर्ति को स्थिर करने के लिए दिल्ली की वितरण कंपनियां राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के साथ बिजली खरीद समझौतों पर काफी हद तक निर्भर हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोड प्रबंधन के लिए एआई-आधारित मांग पूर्वानुमान प्रणाली और सौर, जल और पवन ऊर्जा सहित लगभग 2,670 मेगावाट रिन्यूवेबल एनर्जी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसी बीच दिल्ली की जल आपूर्ति प्रणाली भी गर्मी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। खपत में भारी वृद्धि के बावजूद दिल्ली जल बोर्ड के ट्रीटमेंट प्लांट प्रतिदिन 1,000 मिलियन गैलन के लक्ष्य उत्पादन से कम पर चल रहे हैं।

राजधानी के मुख्य जल स्रोत यमुना नदी के कम प्रवाह और प्रदूषिण ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है। दिल्ली के बड़े हिस्से, विशेष रूप से पाइपलाइन कनेक्शन से वंचित अनधिकृत कॉलोनियां, अभी भी पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं। यहां लोगों का आरोप है कि उन्हें बराबर समय पर पानी नहीं मिल रहा है।

इसके जवाब में, दिल्ली सरकार ने पीक सीजन से पहले ही समर एक्शन प्लान- 2026 की शुरुआत कर दी है। इस पहल में लगभग 1,000 जीपीएस-सक्षम पानी के टैंकरों की तैनाती, फोटो आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन के साथ मोबाइल ऐप, ट्यूबवेल नेटवर्क का विस्तार और शहर भर में 28 आपातकालीन जल केंद्रों की स्थापना शामिल है।

अधिकारियों ने पानी की गुणवत्ता की निगरानी भी बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 1,600 से अधिक नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि, तमाम प्रयासों के बीच कई क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर राहत सीमित ही है। सरकारी आश्वासनों के बावजूद, कई इलाकों में पानी के लिए लंबी कतारें, अनियमित टैंकर आपूर्ति और बार-बार बिजली कटौती जारी है।

अभी जून का महीना बाकी है। इसे पारंपरिक रूप से दिल्ली की सबसे भीषण गर्मी का महीना माना जाता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले हफ्तों में पानी और बिजली को लेकर दबाव और भी बढ़ सकता है। इसे लेकर भी सचेत रहने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें- यूपी में तपिश से तड़पते लोग, अब आंधी-बारिश से मिलेगी राहत; मौसम विभाग ने दिया बड़ा अपडेट

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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