केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रतन यू. केलकर को राज्य के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा अपना सचिव नियुक्त किए जाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और भारतीय जनता पार्टी दोनों ने इस फैसले के पीछे के मकसद पर सवाल उठाए हैं।
यह रवायत पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिली थी। सत्ता में आने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव नियुक्त किया है। इस पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस ने बड़ी नाराजगी जताई थी और बंगाल में भाजपा-चुनाव आयोग के गठजोड़ जैसे आरोप लगाए थे।
केरल में सतीशन के फैसले पर विपक्षी पार्टियों सवाल
सीपीआई (एम) ने आरोप लगाया है कि इस नियुक्ति से विधानसभा चुनावों की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग गया है। सीपीआई (एम) ने कहा कि सरकार का यह निर्णय बेहद हैरान करने वाला है और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के इस आरोप को पुष्ट करता है कि चुनाव आयोग ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के पक्ष में जाने वाले कदम उठाए।
केलकर की नियुक्ति के संबंध में सीपीआई (एम) ने मनोज कुमार अग्रवाल की नियुक्ति से भी तुलना की। अग्रवाल 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और इन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की देखरेख मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में की थी। अग्रवाल को नई भाजपा सरकार में मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।
लेफ्ट पार्टियों के अलावा भाजपा ने भी हमला बोला है। भाजपा ने केरल में केलकर को नियुक्त किए जाने को कांग्रेस और राहुल गांधी का दोहरा रवैया करार दिया है। भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘तो राहुल जी, केरल में जो हुआ, क्या वह अभी भी ‘चोरी का इनाम’ है या अचानक लोकतंत्र की खूबसूरती?’
दरअसल, बंगाल में मनोज अग्रवाल की बतौर मुख्य सचिव नियुक्ति के बाद राहुल गांधी ने तीखी टिप्पणी की थी और इसे ‘जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम’ करार दिया था।
कांग्रेस अब केरल के लिए क्या दलील दे रही?
केरल के गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चेन्निथला ने इस नियुक्ति का बचाव करते हुए इसे राज्य सरकार का विशेषाधिकार बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, ‘वह एक अच्छे अधिकारी हैं। इस नियुक्ति में कुछ भी असामान्य नहीं है।’
केरल कैडर के 2003 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी केलकर दिसंबर 2024 से केरल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
हाल के महीनों में केलकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और उसके बाद 9 अप्रैल को हुए केरल विधानसभा चुनावों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। इस चुनाव में यूडीएफ ने विधानसभा की 140 सीटों में से 102 सीटें जीतकर सरकार बनाई है। हालांकि, 10 साल बाद सत्ता से बाहर हो चुकी एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ, दोनों ने केरल में एसआईआर के चुनाव आयोग के फैसले का भारी विरोध किया था।

