पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए हैं। राज्य के शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने महिलाओं को 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने को मंजूरी दे दी है। साथ ही मदरसा विभाग और सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के तहत चल रही धर्म आधारित सहायता योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला भी लिया गया है।
सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं के तहत चल रहे मौजूदा प्रोजेक्ट इस महीने के अंत तक जारी रहेंगे, जिसके बाद उन्हें धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। हालांकि मंत्री ने विस्तार से योजना का नाम नहीं बताया, लेकिन राज्य सरकार पहले इमामों को 3,000 रुपये और हिंदू पुजारियों को 2,000 रुपये मासिक सहायता देती थी। पुजारियों को पहले 1500 मिलते थे, चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की थी।
गौरतलब है कि इमामों को मानदेय देने की योजना 2012 में शुरू की गई थी, जब ममता बनर्जी पहली बार सत्ता में आई थीं। वहीं, हिंदू पुजारियों के लिए आर्थिक सहायता योजना सितंबर 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई थी।
अन्नपूर्णा योजना को मंजूरी, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की भी घोषणा
कैबिनेट ने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे के मुताबिक “अन्नपूर्णा योजना” को भी मंजूरी दी है। इसके तहत 1 जून से महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की सहायता दी जाएगी।
सरकार ने कहा है कि जो महिलाएं पहले से लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ ले रही हैं, उन्हें स्वतः इस योजना में शामिल कर लिया जाएगा। वहीं, जो महिलाएं अभी किसी योजना के दायरे में नहीं हैं, उनके लिए नया पोर्टल शुरू किया जाएगा।
राज्य सरकार ने 1 जून से पूरे पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की भी मंजूरी दे दी है। भाजपा इसे महिलाओं को आर्थिक राहत देने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने लगाया पहला ‘जनता दरबार’
इसी बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालने के बाद सोमवार को अपना पहला जनता दरबार भी लगाया। साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने लोगों की समस्याएं और मांगें सुनीं।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी अब नियमित रूप से ऐसे जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इस दौरान छात्रों समेत बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। पश्चिम बंगाल भाजपा ने नई सरकार के पहले सप्ताह के कामकाज को भी प्रमुखता से पेश किया।
पार्टी ने दावा किया कि टीएमसी सरकार 15 साल में जो नहीं कर सकी, डबल इंजन सरकार ने उसकी शुरुआत पहले ही हफ्ते में कर दी है। भाजपा ने कहा कि जनता दरबार और त्वरित प्रशासनिक फैसले आने वाले समय में सरकार की प्रमुख पहचान होंगे।
प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव
नई भाजपा सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में भी बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी शासन के लक्ष्य के तहत मंत्रियों के लिए साफ छवि वाले अधिकारियों की तैनाती शुरू की है।
सरकार ने कई पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS) अधिकारियों को मंत्रियों का “एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट” नियुक्त किया है। सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों का चयन उनकी ईमानदार, पारदर्शी और राजनीतिक रूप से निष्पक्ष छवि को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने नियुक्तियों को लेकर अधिसूचना जारी कर संबंधित अधिकारियों को जल्द नई जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है।
किन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
2013 बैच के डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी बिस्वनाथ चौधरी को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट बनाया गया है। वह फिलहाल हुगली जिला परिषद में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं।
वहीं 2016 बैच के अधिकारी कृष्ण चंद्र मुंडा को पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री खुदीराम टुडु का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में बांकुड़ा में डिप्टी मजिस्ट्रेट-कम-डिप्टी कलेक्टर हैं।
इसके अलावा कौशिक कुमार मैती को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता मंत्री अशोक कीर्तनिया का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट बनाया गया है। मैती इस समय दक्षिण 24 परगना में जिला योजना अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
नबन्ना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इन नियुक्तियों में सेवा रिकॉर्ड, ईमानदारी और प्रशासनिक निष्पक्षता को प्राथमिकता दी गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय का भी हो रहा पुनर्गठन
भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक फेरबदल शुरू हो गए हैं। सीएम शुभेंदु ने मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य सचिवालय के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। पिछले कुछ हफ्तों में कई तबादले और प्रशासनिक बदलाव किए जा चुके हैं।
सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के दौरान सेवा विस्तार पाए 60 वर्ष से अधिक उम्र के 243 अधिकारियों का एक्सटेंशन भी खत्म कर दिया है। इसके अलावा हाल ही में दो आईएएस अधिकारियों की मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्ति की गई है।
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